त्योहार पर पीओपी मूर्तियों की एंट्री बैन
आदेश जारी, लेकिन क्या वाकई होगा पालन?
बांसवाड़ा। गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा से ठीक पहले जिला प्रशासन ने पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियों पर रोक का आदेश जारी कर दिया है। एडीएम अभिषेक गोयल ने एसडीएम, नगर परिषद आयुक्त, नगरपालिका अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों को सख़्त निर्देश दिए हैं कि कहीं भी पीओपी मूर्तियों की स्थापना न होने पाए।
प्रशासन के अनुसार पीओपी मूर्तियां न केवल तालाबों और नदियों को प्रदूषित करती हैं, बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाती हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के मुताबिक इन पर रोक अनिवार्य है।
गाइडलाइन का सार
- मिट्टी व प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों को ही अनुमति।
- तालाब, गार्डन और सार्वजनिक स्थल पर मूर्ति स्थापना से पहले अनुमति जरूरी।
- रासायनिक रंग, थर्माकोल और प्लास्टिक का उपयोग वर्जित।
- विसर्जन केवल तय किए गए विसर्जन कुंडों में ही होगा।
कार्रवाई का अधिकार
एसडीएम, नगर परिषद/नगरपालिका आयुक्त, विकास अधिकारी, पुलिस प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – सभी को कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। उल्लंघन पर मूर्तियों की जब्ती, जुर्माना, एफआईआर और पंडाल सील करने तक की कार्यवाही हो सकती है।
⚠️ लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह आदेश त्योहार से एक दिन पहले जारी करने की क्या मजबूरी थी? क्या वाकई इसका पालन होगा या यह भी केवल कागज़ी आदेश बनकर रह जाएगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि उच्च अधिकारियों को संतुष्ट करने के लिए खानापूर्ति कर दी गई हो और जमीनी स्तर पर कुछ भी न बदले।
👉 जनता अब यही देखना चाहती है कि प्रशासन इस बार सिर्फ़ आदेशों तक सीमित रहता है या सचमुच नियमों की पालन करवाता है

