विभागीय अनुमति बिना निजी स्कूलों में छुट्टी, बच्चों को पीएम रैली में भेजने का आरोप

pnpandey

आरटीआई में खुलासा: जिला शिक्षा अधिकारी बोले – “कोई आदेश जारी नहीं किया गया”
बांसवाड़ा। प्रधानमंत्री की सभा में निजी विद्यालयों के बच्चों और स्कूल बसों के उपयोग को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) कार्यालय ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री के आगमन पर विद्यालयों की छुट्टी अथवा बच्चों को कार्यक्रम में भेजने संबंधी कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था।
आरटीआई कार्यकर्ता एवं पत्रकार पूर्णानंद पांडेय द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने बताया कि 25 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री के आगमन हेतु विद्यालयों की बसों के उपयोग, बच्चों की उपस्थिति और अवकाश को लेकर कार्यालय द्वारा किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया। जवाब में यह भी कहा गया कि इस संबंध में कार्यालय के पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दूसरी ओर, जिला रोजगार कार्यालय की ओर से जारी पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2006 की धारा 6(1) के तहत निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों की सहभागिता के निर्देश दिए गए थे तथा विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भाग लेने हेतु प्रेरित करने की बात कही गई थी। इससे प्रशासनिक स्तर पर विरोधाभासी स्थिति सामने आ रही है।
जानकारों का कहना है कि निजी स्कूल बसों का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए किया जा सकता है। नियमों के अनुसार अवकाश घोषित करने का अधिकार सीमित परिस्थितियों में संस्था प्रधान और जिला कलेक्टर को होता है। आरोप है कि उस दिन न तो जिला कलेक्टर द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया और न ही विभागीय स्तर पर कोई वैध आदेश जारी हुआ, इसके बावजूद कई निजी स्कूलों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूल नहीं बुलाने के संदेश प्रसारित कर दिए।
मामले को लेकर अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यदि बिना अनुमति स्कूलों में छुट्टी रखी गई और बच्चों को राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल किया गया, तो संबंधित विद्यालयों और अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई सामने नहीं आई है।
आरटीआई से सामने आए तथ्यों के बाद जिले में शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

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