बांसवाड़ा में ‘DPS’ के नाम पर बड़ा खेल! 2019 में खुला राज, फिर भी सालों तक चलता रहा फर्जी स्कूल

pnpandey

असली डीपीएस सोसायटी ने किया साफ इनकार—RTI के बाद भी कार्रवाई नहीं, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के गंभीर आरोप
बांसवाड़ा।
जिले में “दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS)” के नाम पर संचालित एक निजी स्कूल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह साफ हो चुका है कि यह स्कूल दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसायटी, नई दिल्ली से बिल्कुल भी संबद्ध नहीं है, इसके बावजूद यह संस्थान वर्षों तक बेखौफ संचालित होता रहा।
खबरें खटाखट के पास उपलब्ध आधिकारिक पत्र के अनुसार, 09 जनवरी 2019 को ही डीपीएस सोसायटी ने स्पष्ट कर दिया था कि बांसवाड़ा स्थित इस स्कूल से उनका कोई संबंध नहीं है। सोसायटी ने यहां तक कहा कि भेजे गए दस्तावेज उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते और उन्हें वापस लौटा दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल—2019 में खुलासा, फिर भी क्यों चलता रहा स्कूल?
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब वर्ष 2019 में ही यह स्पष्ट हो गया था कि स्कूल फर्जी है, तो फिर आखिर किसकी शह पर यह स्कूल अगले कई वर्षों तक चलता रहा?
क्या प्रशासन ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं, या फिर यह किसी बड़े संरक्षण और आर्थिक खेल का हिस्सा था—यह अब जांच का विषय बन गया है।
छोटे बच्चों के भविष्य से भी हुआ खिलवाड़
गंभीर बात यह भी सामने आ रही है कि इस कथित फर्जी स्कूल में छठी और सातवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। ऐसे में उन बच्चों का शैक्षणिक भविष्य अब पूरी तरह अनिश्चितता में पड़ गया है। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने “DPS” नाम की विश्वसनीयता पर भरोसा कर अपने बच्चों का प्रवेश कराया था, लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों द्वारा RTI के माध्यम से जानकारी मांगे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आरोप लगाए जा रहे हैं कि एलिमेंट्री शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की लापरवाही या कथित मिलीभगत के चलते यह स्कूल वर्षों तक चलता रहा, जबकि सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी थी।
कुछ शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता दी, जिसके कारण बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हुआ। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
दस्तावेज और मार्कशीट भी संदेह के घेरे में
खबरें खटाखट के पास स्कूल से जुड़े कई अहम दस्तावेज, जिनमें छात्रों की मार्कशीट और “DPS” नाम के उपयोग से जुड़े प्रमाण शामिल हैं, उपलब्ध हैं। इन दस्तावेजों से आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
मामले के उजागर होने के बाद अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ रही है।
निष्कर्ष:
डीपीएस सोसायटी के 2019 के स्पष्ट इनकार के बावजूद वर्षों तक स्कूल का संचालन होना न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा सीधे तौर पर उन मासूम छात्रों को भुगतना पड़ेगा, जिनका भविष्य इस लापरवाही की भेंट चढ़ गया है।

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