छोटी सरवन का लाइसेंस, बांसवाड़ा में बिक्री! राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोपों के बीच फिर घिरा स्टांप विभाग

pnpandey

बांसवाड़ा में स्टांप विक्रय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व में करोड़ों रुपये के कथित स्टांप घोटाले में कार्रवाई झेल चुके परिवार से जुड़े व्यक्तियों की दोबारा स्टांप विक्रय कार्य में सक्रियता अब प्रशासनिक पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में स्टांप एवं टिकट बिक्री में हुए बड़े घोटाले में स्टांप वेंडर के साथ उसके पिता एवं सहयोगियों की भूमिका सामने आई थी। मामले में जांच के बाद सहयोगी रहे व्यक्ति को भी आरोपी मानते हुए जेल जाना पड़ा था। इतना ही नहीं, वर्तमान में भी संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ बताया जा रहा है। ऐसे गंभीर प्रकरण के बाद यह अपेक्षा थी कि संबंधित व्यक्तियों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर विभाग सख्त निगरानी रखेगा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की लाइसेंस प्रक्रिया में विधिक सतर्कता बरती जाएगी।
लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। आरोप है कि जिस व्यक्ति को छोटी सरवन क्षेत्र के लिए स्टांप विक्रय का लाइसेंस प्रदान किया गया, वह कथित रूप से बांसवाड़ा शहर में बैठकर खुले रूप से स्टांप बिक्री कर रहा है। इसको लेकर आमजन में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर एक क्षेत्र विशेष के लिए जारी लाइसेंस का उपयोग दूसरे क्षेत्र में किस आधार पर किया जा रहा है।
मामले को लेकर राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक संरक्षण के आरोप भी सामने आने लगे हैं। जनचर्चा है कि प्रभावशाली संपर्कों के चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है और विभागीय अधिकारी भी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर सवाल उठता है कि गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति को पुनः स्टांप विक्रय व्यवस्था में सक्रिय होने की अनुमति कैसे मिल रही है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, स्टांप विक्रेता (Stamp Vendor) का लाइसेंस जारी करने से पूर्व संबंधित व्यक्ति के चरित्र, आपराधिक पृष्ठभूमि और विभागीय रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाना आवश्यक माना जाता है। राजस्थान स्टांप नियमों एवं राजस्व विभाग की प्रक्रिया के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आर्थिक अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा राजस्व हानि से जुड़े गंभीर आरोप हों या मामला न्यायालय में विचाराधीन हो, तो लाइसेंस प्रदान करने अथवा नवीनीकरण के समय विभाग को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि पूर्व में करोड़ों रुपये के घोटाले में जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, तो क्या विभाग ने नए सिरे से सत्यापन किया? क्या संबंधित व्यक्ति को वैधानिक रूप से लाइसेंस प्रदान किया गया है, अथवा किसी अन्य लाइसेंसधारी के नाम पर कार्य किया जा रहा है? और यदि लाइसेंस छोटी सरवन के लिए जारी हुआ है, तो बांसवाड़ा शहर में स्टांप विक्रय कैसे किया जा रहा है? यदि ऐसा हो रहा है, तो यह नियमों की भावना के विपरीत माना जा सकता है।
जनचर्चा यह भी है कि यदि विभाग पूरी तरह निष्पक्ष है, तो फिर ऐसे विवादित व्यक्तियों की पुनः सक्रियता को कैसे अनुमति मिल रही है। वहीं यदि विभागीय स्तर पर अनदेखी हुई है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और संभावित मिलीभगत का विषय बन सकता है।
मामले को लेकर अब आवश्यकता इस बात की महसूस की जा रही है कि जिला प्रशासन एवं पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाए तथा यह स्पष्ट करे कि संबंधित व्यक्ति किस अधिकार और किस लाइसेंस के आधार पर बांसवाड़ा में स्टांप विक्रय कार्य कर रहा है। साथ ही यदि किसी प्रकार की नियम विरुद्ध गतिविधि पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आमजन का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था पर बना रहे।

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