बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने जमकर मेहनत की फिर भी नहीं मिली सफलता

pnpandey

बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने जमकर मेहनत की फिर भी नहीं मिली सफलता

खबरे खटाखट  नेटवर्क | May 03

Prabhasakshi

   पश्चिम बंगाल विधान चुनाव नतीजे आ गए है। नतीजों में सत्तारूढ़  tmc      ने एक बार फिर से जीत की हैट्रिक लगाई है जबकि 200 पार का दावा करने वाली भाजपा 80 पार भी नहीं कर सकी है। हालांकि  भाजपा की ओर से खूब मेहनत की गई थी। भाजपा अपने प्रेरणास्रोत  श्यामा प्रसाद मुखर्जी   के जन्म स्थान में कमल खिलाने के लिए अत्यधिक उत्सुक थी। परंतु कहीं ना कहीं चुनावी नतीजों से उसे बड़ा झटका लगा है। भगवा दल ने पूरी मजबूती के साथ  पश्चिम बंगाल    में चुनाव लड़ा पर सफलता नहीं मिल पाई। हां, एक बात जरूर है कि अगर दूसरे मायने से देखें तो भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में बड़ी सफलता हासिल हुई है। 3 सीटों वाली भाजपा इस बार के विधानसभा चुनाव में 77 सीटों पर पहुंच गई है। हालांकि 200 प्लस का उसका सपना पूरी तरह से टूट चुका है। भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में 200 बार का लक्ष्य लेकर उतरी थी। इसके लिए  लोक लुभावने वादे तो किए ही गए थे, साथ ही साथ भाजपा की ओर से पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा गया था।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए जो नतीजे आए उसका तरह-तरह से आकलन किया जा सकता है। परंतु, यह बात भी सच है कि राज्य में पार्टी का कोई बड़ा चेहरा नहीं होने के कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। फरवरी और अप्रैल के बीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री    गृह मंत्री अमित शाह   ने लगभग 38 बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया। प्रधानमंत्री ने 17 जबकि अमित शाह ने 21 बार बहां पहुंचे। अगर कुल मिलाकर कहें तो 1 सप्ताह में एक या दो बार सभाओं को संबोधित करने के लिए दोनों नेता पश्चिम बंगाल पहुंचे। पश्चिम बंगाल को जीतना भाजपा के लिए बेहद ही जरूरी था क्योंकि यह उसके मार्गदर्शक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म स्थली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह तथा अन्य बड़े नेताओं का मेहनत काम नहीं कर पाया।  राज्य के नेता इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि लोगों ने भाजपा के आक्रामकता को खारिज किया है। हालांकि, नेताओं ने लगातार दोहराया कि पार्टी 200 प्लस सीटें पश्चिम बंगाल में जीतेगी। भाजपा का लक्ष्य उत्तर बंगाल में अपने आधार को मजबूत करना तथा दक्षिण बंगाल में पार्टी का आधार बनाना था। पार्टी ने उत्तर बंगाल के कूचबिहार, अलीद्वारपुर और जलपाईगुड़ी में अपने आधार को मजबूत किया परंतु इतना मजबूत नहीं हो सका जो उसे सत्ता के करीब पहुंचा दें।

वर्तमान परिस्थिति में देखें तो भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि लोकसभा चुनाव की तुलना में उसके वोट प्रतिशत कम हुए हैं। लोकसभा में पार्टी ने 40.6% मत हासिल किए थे जो कि इस बार 38.1% के आसपास रहा। तृणमूल कांग्रेस ने अपने मत प्रतिशत में लोकसभा चुनाव की तुलना में भारी बढ़ोतरी की है और उसे इस बार 47.9% वोट मिले जबकि लोकसभा चुनाव में उसे 45.7% मिले थे। लगभग 2 सालों तक पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए कड़ी मेहनत करने वाले राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस के शानदार जीत के लिए श्री दिया और कहा कि भाजपा हार पर आत्म निरीक्षण करेगी। भाजपा को यह भी लगता है कि ममता बनर्जी के बाहरी बनाम बंगाली अभियान ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया। बंगाल की जनता ने तो केंद्रीय भाजपा नेताओं की शानदार उपस्थिति देखी परंतु स्थानीय स्तर पर कोई भी नेता स्टार प्रचारक के रूप में उनके बीच नहीं गया।

 

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