बांसवाड़ा, 25 जून।
अखिल राजस्थान प्रबोधक संघ, जिला बांसवाड़ा के पदाधिकारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रबोधक संवर्ग की वर्षों से लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की। संघ का कहना है कि वर्ष 2008 में गठित प्रबोधक संवर्ग से जुड़ी कई विसंगतियां आज भी दूर नहीं हो सकी हैं, जिससे हजारों प्रबोधक प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन में संघ ने मांग की कि प्रबोधकों की पूर्व सेवा को नियमित सेवा मानते हुए सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाए तथा पुरानी सेवा गणना का लाभ दिया जाए। साथ ही वर्ष 2006 से चली आ रही वेतन विसंगति का भी तत्काल निराकरण किया जाए।
संघ ने वरिष्ठ प्रबोधकों के पुनर्गठन संबंधी मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि गजट नोटिफिकेशन के अनुसार वरिष्ठ प्रबोधक का पद वरिष्ठ अध्यापक के समकक्ष है, लेकिन प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थापन एवं पदोन्नति के मामलों में नियमों के अनुरूप व्यवस्था लागू नहीं की गई है। ऐसे में वरिष्ठ प्रबोधकों को नियमानुसार प्रधानाध्यापक का दायित्व सौंपा जाए अथवा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठ प्रबोधक के पद सृजित किए जाएं।
इसके अतिरिक्त शारीरिक प्रबोधकों की पदोन्नति का मामला भी उठाया गया। संघ ने बताया कि शासन के निर्देशों के बावजूद अनेक वरिष्ठ शारीरिक प्रबोधकों की ऑनलाइन ज्वाइनिंग एवं मैपिंग नहीं हो सकी है, जबकि समान योग्यता वाले अन्य कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है। ऐसे में वंचित प्रबोधकों को भी शीघ्र पदोन्नति प्रदान करने की मांग की गई।
ज्ञापन में संघ ने सभी पात्र प्रबोधकों को शीघ्र पदोन्नत करने तथा प्रबोधकों को TET परीक्षा से मुक्त रखने की भी मांग की है।
संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर के प्रबोधक आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने को बाध्य होंगे।
प्रबोधक संवर्ग की लंबित मांगों के समाधान की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
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