संवेदनशील पहल, मगर सिस्टम पर उठे सवाल: विधायक अर्जुन बामनिया ने दिखाई जिम्मेदारी

pnpandey

बांसवाड़ा। सड़क हादसे में घायल हुए उमेश चरपोटा को बचाया नहीं जा सका, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने जहां एक ओर जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता को उजागर किया, वहीं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत पर भी सवाल खड़े कर दिए।
हादसे की सूचना मिलते ही विधायक अर्जुन सिंह बामनिया तुरंत एमजी हॉस्पिटल पहुंचे और घायल के इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए। डॉक्टरों की सलाह पर उदयपुर रेफर किए जाने के दौरान बेहतर एंबुलेंस की व्यवस्था भी विधायक ने खुद सुनिश्चित करवाई।
सबसे खास बात तब सामने आई जब परिजनों ने इलाज के खर्च को लेकर चिंता जताई। इस पर विधायक बामनिया ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि “वहां जाओ, इलाज कराओ—पैसों की चिंता मत करो। जरूरत पड़े तो और मदद भी की जाएगी।” यह मानवीय पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी।
हालांकि, इस दौरान विधायक ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने साफ कहा कि अस्पताल में सुविधाजनक एंबुलेंस और संसाधनों की कमी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यहां तक कहा कि वे अपने स्तर पर तुरंत दो नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने को तैयार हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या उनकी देखरेख और संचालन की है।
विधायक ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में न्यूक्लियर पावर प्लांट के माध्यम से एंबुलेंस और अन्य संसाधन उपलब्ध करवाए गए थे, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में वे कबाड़ में तब्दील हो गए। उन्होंने अपील की कि यदि कोई जिम्मेदार एनजीओ संस्था सामने आती है, तो वे एंबुलेंस देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि जरूरतमंदों को समय पर बेहतर सुविधा मिल सके।
यह घटनाक्रम एक तरफ जनप्रतिनिधि की सक्रियता और संवेदनशीलता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की खामियों और संसाधनों के रखरखाव में लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।

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