पहाड़ चढ़कर पहुंची स्वास्थ्य टीम या सिर्फ कागजी अभियान?

pnpandey

बांसवाड़ा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए चार दिवसीय विशेष अभियान के तहत सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ स्वयं दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किया। विभाग के अनुसार स्वास्थ्यकर्मी पहाड़ चढ़कर गर्भवतियों तक पहुंचे, नियमित जांच की, हीमोग्लोबिन परीक्षण किए तथा गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विभाग ने यह भी दावा किया है कि आशा सहयोगिनियों द्वारा घर-घर संपर्क कर गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए लाया गया तथा अधिकांश महिलाओं का हीमोग्लोबिन संतोषजनक पाया गया। प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य टीम स्वयं घर-घर जाकर जांच और दवाइयां उपलब्ध करा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह तस्वीर पूरे जिले की वास्तविकता है?
हाल के दिनों में जिले में गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि दुर्गम क्षेत्रों तक नियमित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही थीं, तो फिर ऐसी घटनाएं क्यों हुईं? यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है।
धरातल पर कई स्थानों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि स्वास्थ्य केंद्रों पर आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां वितरण के बजाय डिब्बों में पड़ी रहती हैं। कई जगह नियमित गृह भ्रमण और एएनसी जांच के दावों पर भी सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार रिकॉर्ड तो पूरा बना दिया जाता है, लेकिन वास्तविक सेवाएं समय पर नहीं मिल पातीं।
स्थानीय स्तर पर पहले भी ऐसे वीडियो और समाचार सामने आ चुके हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर दिखाई दिया था। ऐसे में विभाग के ताजा दावों की निष्पक्ष और स्वतंत्र स्तर पर जांच होना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अभियान वास्तव में धरातल पर प्रभावी ढंग से चल रहा है या फिर यह केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग के दावे सही हैं तो यह सराहनीय पहल है, लेकिन यदि कहीं केवल कागजी कार्रवाई हो रही है तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में केवल आंकड़ों या फोटो से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर जांच, दवाइयां और उपचार वास्तव में पहुंचे।
अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्र सत्यापन कर यह सुनिश्चित करे कि जिले के हर दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं वास्तव में उसी गुणवत्ता के साथ पहुंच रही हैं, जैसा दावा किया जा रहा है।

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