नोटिस भी, मान्यता भी! DPS स्कूल मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका पर बड़े सवाल

pnpandey

पत्रकारों के खुलासे के बाद हरकत में आया विभाग, फिर बैकडेट में दी मान्यता – क्या ‘पूरी दाल ही काली’ है?

बांसवाड़ा क्षेत्र में संचालित डीपीएस पब्लिक स्कूल का मामला अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) स्कूल को नोटिस जारी कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उसी स्कूल को 13 फरवरी की तारीख में मान्यता भी दे दी गई।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब अधिकारी खुद मान रहे थे कि स्कूल के दस्तावेज अधूरे हैं और जांच की आवश्यकता है, तो फिर पत्रकारों को “कार्रवाई होगी” का आश्वासन क्यों दिया गया? क्या यह सिर्फ समय निकालने की रणनीति थी या फिर अंदरखाने कोई और खेल चल रहा था?
8 फरवरी को जब पत्रकारों ने इस अवैध स्कूल का खुलासा किया, तब जाकर शिक्षा विभाग हरकत में आया। अगर यह मामला सामने नहीं आता, तो क्या विभाग कभी कार्रवाई करता? और सबसे अहम बात—यदि 13 फरवरी को मान्यता दे दी गई थी, तो फिर उसके बाद दो-दो नोटिस जारी करने का क्या औचित्य था?
यह भी बड़ा प्रश्न है कि जिन बच्चों ने इन वर्षों में इस स्कूल में पढ़ाई की और प्रवेश लिया, उनकी शिक्षा की वैधता किस आधार पर तय की गई? बिना मान्यता के चल रहे स्कूल में पढ़े छात्रों का भविष्य किसने सुरक्षित किया?
पूरे मामले में यह संदेह और गहरा होता जा रहा है कि कहीं न कहीं विभागीय स्तर पर मिलीभगत से इस स्कूल को बचाने की कोशिश की गई। “दाल में कुछ काला है” या “पूरी दाल ही काली है”—यह अब जांच का विषय बन चुका है।
अब यह मामला प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तक पहुंचाने की तैयारी है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
जनता की मांग:
इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

Share This Article
Leave a Comment