जब बांसवाड़ा की बहनों ने रची “राखी की कहानी”, आकांक्षा हाट बना बदलाव की तस्वीर

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📰 ज़मीनी हकीकत | खबरें खटाखट 📍 बांसवाड़ा से विशेष रिपोर्ट 🗓️ 2 अगस्त 2025

जब बांसवाड़ा की बहनों ने रची “राखी की कहानी”, आकांक्षा हाट बना बदलाव की तस्वीर

राज्य के बड़े अफसर भी रह गए हैरान, मुख्यमंत्री बोले – ये राखियाँ सिर्फ धागे नहीं, उम्मीद की डोर हैं!

रिपोर्ट: पूर्णानंद पांडेय “खबरें खटाखट” बांसवाड़ा — कभी सिर्फ घरों तक सीमित रहने वाली महिलाएं जब हुनर के साथ बाहर निकलती हैं, तो इतिहास बनता है। ऐसा ही कुछ हुआ बांसवाड़ा में, जब आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत पहली बार “आकांक्षा हाट” का आयोजन हुआ।

यह सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि यह बदलाव की वो तस्वीर थी जिसमें महिलाओं ने अपने हाथों से बुनी राखियाँ, हर्बल साबुन, मिलेट्स, और सुगंधित अचार को देश-दुनिया तक पहुंचाने का सपना देखा और दिखाया।

मुख्यमंत्री भी हुए मुरीद, कहा – ये राखियाँ पूरे देश को जोड़ रही हैं

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जब इस हाट में पहुंचे तो एक कोने में खड़ी राजीविका की बहन लीला ने उन्हें राखी दिखाई। एक पल को वो मुस्कुराए, फिर कहा –

“ये राखियाँ सिर्फ धागे नहीं हैं, ये आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर हैं।”

यह सुनते ही वहां मौजूद दर्जनों महिलाओं की आँखों में चमक आ गई – शायद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने इतनी आत्मीयता से उनके काम की सराहना की थी।

IAS अफसरों ने जाना महिलाओं का संघर्ष, और उनके सपनों की उड़ान

राज्य मिशन निदेशक (राजीविका) नेहा गिरी, प्रमुख शासन सचिव मंजु राजपाल, और कृषि विभाग की आयुक्त चिन्मयी गोपाल – ये सभी वरिष्ठ अधिकारी जब स्टॉल्स पर पहुंचे, तो हर एक महिला से बात की। किसी ने बताया – “मैडम, हम घर से पहली बार बाहर निकले हैं, ये राखी मेरी पहली कमाई है।” किसी ने कहा – “अब हम बाजार की बात करते हैं, ऑनलाइन बेचने की योजना बना रहे हैं।”

SMD नेहा गिरी ने यह भरोसा दिलाया कि ऐसे आयोजन अब अन्य जिलों में भी किए जाएंगे।

राजीविका का जनसैलाब और DPM धनपत सिंह राव की अगुवाई

हाट के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निभाई ज़िला परियोजना प्रबंधक श्री धनपत सिंह राव और उनकी टीम ने। उन्होंने बताया –

“हमने 1000 से ज्यादा उत्पादों की एक सूची तैयार की है, हर महीने के लिए कैलेंडर बना लिया है। अब इन उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पहुंचाना अगला लक्ष्य है।”

साफ है कि बांसवाड़ा की महिलाएं अब सिर्फ गांव की नहीं, देश की सोच बन चुकी हैं।

कुछ खास चेहरे, कुछ खास लम्हे

  • धर्मिष्ठा और रीता जैसी महिलाओं ने तिलक और पुष्प से स्वागत कर परंपरा और नवाचार का सुंदर समन्वय दिखाया।
  • लीला यादव की बनाई राखियों को लेकर जब मुख्यमंत्री ने “शाबाशी” दी, तो वो भावुक हो गईं।
  • हर्बल साबुन बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि उनके प्रोडक्ट्स अब उदयपुर और चित्तौड़ तक भी पहुंचने लगे हैं।

निष्कर्ष: आकांक्षा अब हकीकत है

“आकांक्षा हाट” ने साबित कर दिया कि जब अवसर और मंच मिल जाए, तो गांव की महिलाएं भी वैश्विक बाज़ार का हिस्सा बन सकती हैं। बांसवाड़ा की इस पहल ने साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर भारत की असली कहानी शहरों से नहीं, गांव की गलियों से शुरू होती है।

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