स्वागत सूची की राजनीति: जमीन पर बैठी निष्ठा और खड़े चाटुकार”

pnpandey

बांसवाड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बांसवाड़ा दौरे के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने भाजपा संगठन की आंतरिक स्थिति और तथाकथित “स्वागत संस्कृति” पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष शीतल भंडारी का जमीन पर बैठ जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत क्षण नहीं था, बल्कि यह उस व्यवस्था का प्रतीक बन गया जिसमें असली कार्यकर्ता हाशिये पर और चाटुकार केंद्र में नजर आते हैं।
कार्यक्रम की “स्वागत सूची” ने सबसे ज्यादा विवाद खड़ा किया। आरोप है कि सूची में ऐसे नाम प्रमुखता से शामिल किए गए जिनका संगठन में कोई ठोस योगदान या पद नहीं है, लेकिन वे चाटुकारिता के दम पर आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह रही कि हाल ही में अन्य दलों, विशेषकर कांग्रेस से आए कुछ नए चेहरों को भी प्राथमिकता दी गई, जबकि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
इसी कड़ी में पूर्व प्रधान और भाजपा के प्रवक्ता निर्मल मकवाना का नाम स्वागत सूची में शामिल न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह संगठन की अनदेखी है या फिर जानबूझकर की गई उपेक्षा? जब अनुभवी और जमीनी नेताओं को दरकिनार किया जाता है, तो संदेश साफ जाता है कि संगठन में योग्यता नहीं, बल्कि निकटता और चापलूसी ज्यादा मायने रखती है।
वहीं, एक महिला पार्षद को विशेष महत्व देकर स्वागत सूची में प्रमुखता देना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठता है कि क्या यह निर्णय संगठनात्मक संतुलन और वरिष्ठता को ध्यान में रखकर लिया गया था या फिर व्यक्तिगत समीकरणों का परिणाम था?
घटना के बाद जिला अध्यक्ष पूंजीलाल द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। इससे यह प्रतीत होता है कि समस्या के मूल कारणों को समझने के बजाय, उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
कटाक्ष:
जब स्वागत की सूची “समर्पण” नहीं, बल्कि “समर्पण दिखाने की कला” पर बनती हो, तब जमीन पर बैठने वाले कार्यकर्ता ही असली ऊंचाई पर होते हैं और मंच पर खड़े लोग केवल दिखावे की ऊंचाई नापते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक कार्यक्रम की अव्यवस्था नहीं, बल्कि संगठन के भीतर पनप रही उस संस्कृति का आईना है, जहां निष्ठा की कीमत घटती जा रही है और चाटुकारिता का मूल्य बढ़ता जा रहा है। अगर समय रहते इस पर आत्ममंथन नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई देगा।

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