सनातन की आस्था अमर, सोमनाथ का स्वाभिमान अडिग: अमित शाह

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और जनमानस की आस्था को मिटाना असंभव है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि सदियों में 16 बार विध्वंस के प्रयास हुए, आक्रमणकारी इतिहास में गुम हो गए, लेकिन सोमनाथ आज भी समुद्र तट पर उसी स्थान पर शान से खड़ा है और उसका ध्वज गर्व से लहरा रहा है।
गुजरात के गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। यह पूरी दुनिया को संदेश देता है कि भारत का सनातन धर्म, उसकी संस्कृति और जनता की आस्था सूर्य-चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है। सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व वर्षभर
शाह ने घोषणा की कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ पूरे वर्ष मनाया जाएगा और देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्ष पूर्व महमूद गजनी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब तक कई आक्रमणकारियों ने सोमनाथ को निशाना बनाया, लेकिन हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। विध्वंसक विनाश में विश्वास रखते थे, जबकि निर्माता सृजन में आस्था रखते हैं।
उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संकल्प से सोमनाथ का पुनर्निर्माण संभव हुआ। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—सोमनाथ पर हमला केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि भारत की आस्था, धर्म और आत्मसम्मान पर हमला था।
गांधीनगर में अत्याधुनिक बायो सेफ्टी लैब का शिलान्यास
केंद्रीय गृह मंत्री ने गांधीनगर में 362 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली अंतरराष्ट्रीय तकनीक से युक्त बायो कंटेनमेंट सुविधा वाली बायो सेफ्टी लैब-4 और एनिमल बायो सेफ्टी लेवल लैब का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि पुणे के बाद यह देश की दूसरी बीएसएल-4 लैब होगी, जो घातक वायरस की पहचान और पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाएगी। यह लैब शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए नए अवसर भी सृजित करेगी।
स्टार्टअप्स में ऐतिहासिक बढ़त
शाह ने बताया कि 2014 में देश में स्टार्टअप्स की संख्या 500 से कम थी, जो आज 10 हजार से अधिक हो चुकी है। इनक्यूबेटरों की संख्या 6 से बढ़कर 95 हो गई है, जबकि इनक्यूबेशन स्पेस 60 हजार वर्गफुट से बढ़कर 9 लाख वर्गफुट तक पहुंच गया है। निजी निवेश 10 करोड़ से बढ़कर 7,000 करोड़ रुपये हो गया और पेटेंट फाइलिंग 125 से बढ़कर 1,300 के पार पहुंच गई है। इससे स्पष्ट है कि भारत का युवा अब नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है।

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