“2014 के बाद से नेहरू की आलोचना के माध्यम से चल रहा शासन”: जयराम रमेश
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को एक पुस्तक के लॉन्च के दौरान भारत में नेहरू के विचारों और उनके योगदान पर बात की। उन्होंने यह टिप्पणी की कि जवाहरलाल नेहरू के आलोचक और प्रशंसक दोनों ही उनकी छाया में जी रहे हैं, और 2014 के बाद से भारत में सबसे ज्यादा नेहरू की आलोचना के माध्यम से ही शासन चल रहा है।
आदित्य मुखर्जी की किताब ‘नेहरूज़ इंडिया’ का लॉन्च
जयराम रमेश ने यह बयान आदित्य मुखर्जी की किताब ‘नेहरूज़ इंडिया’ के लॉन्च के दौरान दिया। इस किताब में भारतीय राजनीति, समाज और नेहरू के विचारों पर गहरी चर्चा की गई है। जयराम रमेश ने कहा कि इस किताब की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि “न केवल भारत के विचार, बल्कि नेहरू के विचार का भी बचाव करने की जरूरत है”।
नेहरू की आलोचना पर जयराम रमेश का विचार
रमेश ने यह भी कहा कि 2014 के बाद से सत्ता में बैठे नेताओं ने नेहरू के योगदान और विचारों को लगातार आलोचना का लक्ष्य बनाया है। उनका मानना है कि नेहरू के विचारों की आलोचना करके ही राजनीति में आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है।
नेहरू की विचारधारा की रक्षा
रमेश ने नेहरू की विचारधारा की रक्षा की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज के समय में यह ज़रूरी हो गया है कि नेहरू के विचारों का बचाव किया जाए, ताकि उनके दृष्टिकोण को सही तरीके से समझा जा सके। उनका कहना था कि जिनकी आलोचना की जा रही है, उन्हें समझने और उनके योगदान को सराहने की आवश्यकता है।
किताब का महत्व
इस किताब के माध्यम से आदित्य मुखर्जी ने नेहरू के विचारों की गहरी समीक्षा की है और उनके योगदान को न केवल भारतीय राजनीति बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी उनके प्रभाव के संदर्भ में रखा है। यह किताब उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकती है जो नेहरू के विचारों को समझने में रुचि रखते हैं।
संक्षेप में, जयराम रमेश ने नेहरू के विचारों की प्रासंगिकता और उनकी आलोचना की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान शासन के तहत नेहरू की आलोचना करके राजनीति की जा रही है, जो भारतीय समाज और राजनीति के लिए एक चुनौतीपूर्ण दृष्टिकोण हो सकता है।

