(खबरें खटाखट | विशेष रिपोर्ट)
महात्मा गांधी चिकित्सालय के समीप सोमवार को दोपहर 12:05 बजे से 1:55 बजे तक कथित तौर पर बारात में ढोल-नगाड़े बजते रहे, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्साकर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज शोर के कारण वार्डों में उपचाररत मरीज असहज दिखे और अस्पताल परिसर में अव्यवस्था की स्थिति बनी रही।
सूत्रों के मुताबिक यह बारात अस्पताल के 100 मीटर के दायरे से होकर गुज़री, जबकि नियमों के अनुसार अस्पताल क्षेत्र साइलेंट ज़ोन में आता है और वहां किसी भी प्रकार का बैंड-बाजा, ढोल या तेज ध्वनि पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद करीब एक घंटे पचास मिनट तक शोर जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्व-घोषित पत्रकार की भूमिका पर सवाल
मामले में यह भी कथित आरोप सामने आए हैं कि बारात में शामिल एक व्यक्ति स्वयं को “स्व-घोषित पत्रकार” बताता रहा। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई न होने से प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
कानून क्या कहता है
कानूनन अस्पतालों के आसपास शोर-शराबा किसी भी समय निषिद्ध है। Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000, IPC की धारा 268/290 तथा CrPC धारा 133 के तहत प्रशासन को मौके पर ही कार्यक्रम रोकने, उपकरण जब्त करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जिम्मेदार आयोजकों व बैंड संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मरीजों की शांति और स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो।
नोट: यह समाचार उपलब्ध तथ्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
महात्मा गांधी चिकित्सालय के पास ढोल-नगाड़ों का शोर, मरीज रहे परेशान; नियमों की खुली अनदेखी का आरोप
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