बागीदौरा – जमीन को दूषित होने से बचाने और उर्वरक शक्ति को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान सहित देशभर में भूमि सुपोषण एवम सरंक्षण राष्ट्रीय जन अभियान का शुभारंभ 13 अप्रैल से करेगा।
इस हेतु बागीदौरा खंड की बैठक विद्या निकेतन विद्यालय परिसर में रविवार को आयोजित की गई जिसमें इस अभियान के बागीदौरा खण्ड संयोजक अरुण जोशी ने बताया की बंगलुरु में हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में यह निर्णय किया गया है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भूमि की उत्पत्ति मानी जाती है और इसी दिन से भूमि सुधार महाभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के तहत देश की हर तहसील स्तर पर गांव—गांव गोबर आधारित जैविक खाद का ही उपयोग करने के लिए जागरुकता फैलाई जाएगी
इसमें संघ के ग्राम विकास विभाग, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण के अलावा कई धार्मिक,सामाजिक संगठन साथ होंगे।
इस अभियान का मूल उद्देश्य भारतीय कृषि पध्द्ति उपज और गैर-रासायनिक खेती का सफलतापूर्वक अभ्यास करना है। जो कि देशभर में चैत्र नवरात्रि यानि 13 अप्रैल 2021 की सुबह 10 बजे से शुरू किया जाएगा। और संपूर्ण देश के अलग-अलग राज्यों, जिलों, ग्रामों, एंव नगरों में विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाएगा।
सभी जगहों पर विधिवत भूमि पूजन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर किया जाएगा। इस अभियान की मुख्य संकल्पना यही है कि, भूमि का सुपोषण करना यह मात्र कृषकों का उत्तरदायित्व नहीं अन्यथा भूमि का सुपोषण एंव संरक्षण प्रत्येक भारतीयों का उत्तरदायित्व है।
बहुआयामी जन अभियान में समग्र भूमि सुपोषण अवधारणा को फिर से स्थापित करने के लिए कार्यवाही, जन जागरण जागरूकता सृजन, भारतीय कृषि चिंतन एंव भूमि सुपोषण को बढ़ावा देने संबंधित कार्यक्रम शामिल है। खण्ड के 31 स्थानों पर वर्ष प्रतिपदा के दिन भूमि पूजन होगा।उसके बाद बाकी गाँवो में क्रमशः 1 माह त hक चलेगा
साथ ही इस अवसर पर विभाग कार्यवाह अशोक सुथार ने बताया कि अभियान के प्रथम चरण की गतिविधियों में भूमि सुपोषण को प्रत्यक्ष साकार करने वाले कृषकों को सम्मानित करना, भूमि सुपोषण की विविध पध्दतियों के प्रयोग आयोजित करना, व जो कृषक इस दिशा में बढ़ना चाहे उन सभी को प्रोत्साहित करना, नगरों में विधिवत हाउसिंग कालोनी में जैविक-अजैविक अपशिष्ट को अलग रखना और कालोनी के जैविक अपशिष्ट से कंपोस्ट (जैविक खाद) बनाना इत्यादि शामिल है।
आधुनिक कृषि में भूमि का स्थान मात्र एक आर्थिक स्त्रोत है। परतुं हमने पिछले 200 वर्षों से भी अधिक समय तक भूमिपूजन की अनदेखी की और अपनी भूमि का अनंत आर्थिक संसाधन के रूप में दोहन भी किया है। व हम न्यूनतम पारस्परिकता के साथ अपनी भूमि से पोषक तत्व निकाल रहे है। जिसके चलते भूमि की जल धारण क्षमता कम हो रही है, जल स्तर अधिकांश स्थानों में लगातार घट रहा है, जैविक कार्बन की मात्रा का निरंतर घटना रहा है, जिससे भूमि लगातार कुपोषित हो रही है साथ-साथ मानव भी विभिन्न रोगों का शिकार हो रहा है।
वर्तमान में हमारे भौगोलिक क्षेत्र का 30% भाग गंभीर रूप से क्षरण से पीड़ित हो चुका है। और किसानों के अनुभव के अनुसार कृषि में इनपुट लागत लगातार बढ़ रही है, और उत्पादकता लगातार घट रही है। उत्पादन में कमी के परिणामस्वरूप जैविक कार्बन में कमी हो रही है। जो की बेहद हानिकारक है।
विश्व हिंदू परिषद बांसवाड़ा के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख तरुण कुमार अडीचवाल ने बताया की उक्त बैठक में बाँसवाड़ा जिले से विद्या भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, किसान संघ वनवासी कल्याण परिषद, विश्व हिंदू परिषद, भाजपा सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता जिनमे कमलकांत कटारा, नाथूलाल पाटीदार, रणछोड़ सोलंकी, परबतेंग चौहान, गुमानेंग चौहान,राजेश पाटीदार ,भगवती पाठक, नाथजी पटेल उपस्थित रहे।


