बांसवाड़ा। जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दिल्ली पब्लिक स्कूल से जुड़े मामले में अब नए और गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
⚠️ शाला दर्पण में नाम नहीं, फिर भी कक्षाओं का संचालन!
सूत्रों के अनुसार, संबंधित विद्यालय शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज ही नहीं था, इसके बावजूद:
स्कूल में छठी और सातवीं कक्षा का संचालन किया गया
विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाया गया
परीक्षाएं भी आयोजित की गईं
यह स्थिति अपने आप में नियमों का खुला उल्लंघन मानी जा रही है, क्योंकि बिना पंजीकरण और मान्यता के इस स्तर की कक्षाएं चलाना अवैध है।
📄 गलत तरीके से TC (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी करने का आरोप
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि:
छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए
दूसरे स्कूलों से “गलत तरीके से” ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) जारी करवाए गए
उन्हीं TC के आधार पर बच्चों को अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया
अब सवाल यह उठता है कि: 👉 जिन स्कूलों ने ये TC जारी किए, उनकी भूमिका क्या है?
👉 क्या यह एक संगठित स्तर पर की गई अनियमितता है?
🔍 जांच के घेरे में कई संस्थान
इस पूरे मामले में केवल एक स्कूल ही नहीं, बल्कि:
TC जारी करने वाले अन्य विद्यालय
संबंधित विभागीय अधिकारी
सभी जांच के दायरे में आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण की जिला स्तर के साथ-साथ उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
⚖️ बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, मुआवजे की मांग
स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि:
बिना मान्यता स्कूल चलाकर
गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश दिलाकर
👉 बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया
इसलिए मांग उठ रही है कि:
संबंधित विद्यालय से प्रभावित छात्रों को आर्थिक मुआवजा दिलाया जाए
उनकी शिक्षा में हुए नुकसान की भरपाई की जाए
🏫 नियम क्या कहते हैं?
राजस्थान में किसी भी विद्यालय को संचालित करने के लिए राजस्थान शिक्षा विभाग के तहत:
शाला दर्पण पर पंजीकरण
मान्यता प्रमाण पत्र
RTE नियमों का पालन
अनिवार्य होता है।
इनके बिना स्कूल संचालन पूरी तरह अवैध माना जाता है।
❗ प्रशासन से सीधे सवाल
अब पूरे मामले में सबसे बड़े सवाल यह हैं:
जब स्कूल शाला दर्पण पर दर्ज नहीं था, तो कक्षाएं कैसे संचालित हुईं?
छात्रों को दूसरे स्कूलों से TC कैसे जारी हुए?
क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब हुआ?
बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
📢 कड़ी कार्रवाई की मांग
जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:
मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए
दोषी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई हो
और प्रभावित छात्रों को तत्काल राहत व मुआवजा दिया जाए
👉 यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।
बांसवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा खुलासा: बिना मान्यता चलती रही स्कूल, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
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