नीमकाथाना जिला निरस्तीकरण के फैसले का विरोध तेज, संघर्ष समिति भूख हड़ताल पर
नीमकाथाना: राजस्थान सरकार द्वारा नीमकाथाना जिले को निरस्त करने के निर्णय के बाद इलाके में विरोध की लहर तेज हो गई है। स्थानीय नागरिक, व्यापारी, और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले को जनभावनाओं के खिलाफ बताया है। इस निर्णय के विरोध में जिला बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है।
संघर्ष समिति ने की भूख हड़ताल की घोषणा
संघर्ष समिति के सदस्यों ने सोमवार से कलेक्ट्रेट के बाहर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। समिति का कहना है कि नीमकाथाना को जिला घोषित करना स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग रही है, जिसे निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक जिला यथावत रखने की घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बाजार बंद और व्यापक समर्थन
नीमकाथाना में विरोध स्वरूप बाजार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। व्यापारी संगठनों ने भी संघर्ष समिति को समर्थन देते हुए कहा है कि जिले की मांग जनता के हक की बात है।
स्थानीय व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा, “जिले का दर्जा मिलने से विकास कार्यों को गति मिलती, लेकिन अब इसे निरस्त करने का निर्णय क्षेत्र के साथ अन्याय है। हम सभी इस आंदोलन के साथ खड़े हैं।”
जनता में आक्रोश
फैसले के बाद से आम जनता में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जिला बनने से प्रशासनिक कामकाज में आसानी होती और नीमकाथाना विकास की मुख्यधारा में आता।
नीमकाथाना निवासी रामलाल शर्मा ने कहा, “हमारे क्षेत्र का जिला बनने का सपना चूर-चूर हो गया है। यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो विरोध और उग्र होगा।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजनीतिक दलों ने भी इस फैसले की आलोचना की है। कई नेताओं ने इसे सरकार की क्षेत्रीय विकास के प्रति उदासीनता करार दिया।
आगे की रणनीति
संघर्ष समिति ने भूख हड़ताल के अलावा सरकार तक अपनी मांग पहुँचाने के लिए ज्ञापन सौंपने और शांतिपूर्ण रैलियाँ निकालने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। कलेक्टर ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की और बताया कि सरकार तक उनकी मांगें पहुँचाई जाएंगी।
निष्कर्ष:
नीमकाथाना के लोगों की वर्षों पुरानी मांग का निरस्तीकरण क्षेत्र में असंतोष और आक्रोश पैदा कर रहा है। संघर्ष समिति और आम जनता सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की उम्मीद कर रही है। अब देखना यह है कि सरकार जनता की इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।

