नई आबकारी नीति का शराब व्यवसाईयों ने किया विरोध
आबकारी नीति में संशोधन किए जाने की उठाई मांग
कोटा वीरेंद्र दायमा । कोटा में शराब व्यवसाईयों ने नई आबकारी नीति का विरोध कर आपत्ति जताई है। आबकारी नीति में संशोधन किए जाने की मांग उठाई है। शराब व्यवसायियों ने आरोप लगाते हुए बताया कि आबकारी विभाग अनावश्यक रूप से शराब कारोबारियों पर भार डाल रहा हैं। ऐसे में नई शराब नीति किसी भी सूरत में स्वीकार योग्य नहीं हैं।संशोधन की मांग को लेकर शराब कारोबारियों ने एकजुट होकर सरकार व विभाग से मांग की है कि वह इसमें बदलाव करें और शराब व्यवसाईयों के हित का भी ध्यान रखा जाए। वाइन कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन कोटा के अध्यक्ष विनोद पारेता ने बताया कि आबकारी विभाग द्वारा वर्ष 2022-23 व 2023-24 की जो आबकारी नीति जारी की है, उसमें संशोधन निकाले हैं उसके संदर्भ में शराब व्यवसायी उन संशोधनों से संतुष्ट नहीं है। नए आदेश की पालना शराब व्यवसाईयों द्वारा किए जाना बेहद कष्टप्रद होगा। उन्होंने कहा कि दुकानों का नवीनीकरण जो 15 प्रतिशत बढ़ाकर किया जा रहा है वह बिल्कुल भी सही नहीं हैं। क्योंकि वे 15 प्रतिशत की गारंटी बढ़ते ही शराब का माल इतना हो जाएगा कि हम उसे बेच नहीं पाएंगे। विनोद पारेता बताया कि संशोधन में अतिरिक्त आबकारी शुल्क को वाइन व बीयर व इकक ब्रांड मैं कम किया है, उससे हमें ड्यूटी का गारंटी में भराव कम मिलेगा और पेटियों की संख्या बढ़ जाएगी जिससे हम पर अतिरिक्त भार आ जाएगा। उन्होंने कहा कि जो दुकानें पिछले वर्ष 25 अप्रैल के बाद में उठी है उनका नवीनीकरण जिस नियम से कर रहे हैं वह पूर्ण रूप से गलत है क्योंकि वह दुकानें पहले भी कमजोर थी इसकी वजह से ही पिछले वर्ष विभाग ने इन्हें कम कर इसकी नीलामी की थी। इन्हें और बढ़ाकर देने से कोई औचित्य नहीं है। आरटीडीसी को इस बार फिर से दुकानें लगाने की अनुमति दे दी है जिससे व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। उन पर किसी प्रकार का गारंटी की बाध्यता भी नहीं रखी गई है, इसलिए उसका प्रभाव सीधे-सीधे हमारी दुकानों पर पड़ेगा। पारेता ने कहा कि आबकारी ड्यूटी व अन्य टैक्स विभाग द्वारा कभी भी मध्य वित्तीय वर्ष के मध्य बढ़ा दिया जाता है, वह भी न्यायोचित नहीं है, क्योंकि हम दुकानें इस आबकारी नीति को देखकर लेते हैं और विभाग इसमें वित्तीय वर्ष के मध्य में कई बार संशोधन करता रहता है जिसका सीधा असर हमारे व्यापार पर पड़ता है।
– व्यवसाईयों के मुनाफे की बढोत्तरी नहीं
वाइन कॉन्ट्रैक्ट एसोसियेशन कोटा के अध्यक्ष विनोद पारेता ने कहा कि देशी मदिरा व आरएमएल की पर पेटी 40-50 रुपये की बढ़ोतरी होने से हमारी खरीद तो बढ़ गई है, मगर हमारे मुनाफे में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की है जिससे हमें सीधा सीधा नुकसान है। शराब व्यवसाईयों ने मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार बियर बार में लाइसेंस फीस को त्रैमासिक किया है। दुकानों में जो वार्षिक लाइसेंस फीस ली जाती है, उसे भी त्रैमासिक किया जाना चाहिए। इन सभी मांगों को लेकर आबकारी विभाग को विचार विमर्श करना चाहिए ताकी अनावश्यक आ रही परेशानी से बचा जा सके। पारेता ने कहा कि नई नीति किसी भी रूप में व्यवहारिक नहीं हैं, इसमें शराब व्यवसाईयों के सुझाव भी शामिल किए जाने चाहिए।

