जोधपुर/बांसवाड़ा। राजस्थान में शिक्षा के अधिकार (RTE) योजना के तहत जोधपुर में सामने आए करोड़ों रुपए के घोटाले के बाद अब बांसवाड़ा जिले का शिक्षा विभाग भी विवादों में घिरता नजर आ रहा है। आरोप है कि जिले में कई ऐसे निजी विद्यालयों को आरटीई योजना का लाभ दिया गया, जिनका वास्तविक अस्तित्व तक नहीं है। इसके बावजूद वर्षों से इन स्कूलों के नाम पर सरकारी भुगतान जारी होता रहा।
जोधपुर में आरटीआई के माध्यम से सामने आए मामले में 50 से अधिक निजी विद्यालय केवल कागजों में संचालित पाए गए। जांच में खुलासा हुआ कि कई स्कूल मौके पर मौजूद ही नहीं थे, लेकिन गरीब बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए जारी कर दिए गए। मामले में चार स्कूलों गोपाल आदर्श विद्यालय , अरावली पब्लिक स्कूल संस्कार यूपी स्कूल , रेडी स्कूल को करीब 1 करोड़ 6 लाख 32 हजार रुपए का भुगतान सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार त्रिपाठी को एपीओ किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।
इधर बांसवाड़ा में भी एलिमेंट्री शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता पूर्णानंद पांडे का आरोप है कि जिले में कई ऐसे विद्यालय आरटीई योजना में शामिल हैं, जहां मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कुछ स्थानों पर तो विद्यालय भवन की स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि वहां बच्चों की पढ़ाई तो दूर, पशु बांधना भी मुश्किल है। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में वहां बच्चों के अध्ययन और भुगतान का उल्लेख किया जा रहा है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि कुछ विद्यालय वर्षों तक बिना वैध मान्यता के संचालित होते रहे। आरोप है कि जिन स्कूलों को वर्ष 2025-26 में मान्यता मिली, वे वर्ष 2017 से ही संचालन में दर्शाए जाते रहे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक विभाग ने कार्रवाई क्यों नहीं की और उन बच्चों का भविष्य किस आधार पर दांव पर लगाया गया?
दिल्ली पब्लिक स्कूल और फलवा क्षेत्र के लिटिल पब्लिक स्कूल को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि शिकायतों और आरटीआई के बावजूद विभाग ने इन संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
आरटीआई कार्यकर्ताओं ने एलिमेंट्री जिला शिक्षा अधिकारी शम्मे फरोजा बतुल अंजुम और कार्यालय कर्मचारी हिरल झा पर भी सूचना देने में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आरटीआई आवेदन लेने के बाद उन्हें डिस्पैच क्रमांक तक उपलब्ध नहीं कराया जाता और बार-बार कार्यालय के चक्कर कटवाए जाते हैं। आरोप है कि 7 अप्रैल और 13 मई को दिए गए आरटीआई आवेदन का आज तक डिस्पैच नंबर नहीं दिया गया।
जिले में आरटीई योजना के तहत स्कूलों के सत्यापन, मान्यता और भुगतान प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर संदेह खड़े कर रहे हैं। यदि निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो बांसवाड़ा में भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
कागजों में चल रहे स्कूल, करोड़ों का भुगतान! बांसवाड़ा शिक्षा विभाग पर उठे गंभीर सवाल
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