प्रदेश में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार अधिकारियों को औचक निरीक्षण के निर्देश दे रहे हैं। उद्देश्य साफ है—जमीनी हकीकत सामने आए, कमियां पकड़ी जाएं और आमजन को बेहतर सेवाएं मिलें। लेकिन चित्तौड़गढ़ में इन निर्देशों की पालना को लेकर तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है।
जिले में प्रभारी सचिव, कलेक्टर या उपखण्ड अधिकारी के निरीक्षण से पहले ही संबंधित कार्यालयों को सूचना पहुंचने की चर्चाएं आम हैं। नतीजतन, निरीक्षण से पहले ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाती हैं, कर्मचारी समय से मौजूद मिलते हैं और स्वागत की तैयारियां पूरी रहती हैं। ऐसे में ‘औचक’ कहे जाने वाले निरीक्षणों में वास्तविक खामियां सामने आएं भी तो कैसे?
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उच्च अधिकारियों को प्रतिदिन कम से कम 10 कार्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में जिले के प्रभारी सचिव वी. सरवण हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर चित्तौड़गढ़ पहुंचे। शनिवार को उन्होंने जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल जिला राजकीय श्री सांवलियाजी चिकित्सालय का निरीक्षण किया। हालांकि, अस्पताल प्रशासन को उनके आगमन की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। निरीक्षण से पूर्व ही अधिकारी और स्टाफ मुस्तैदी के साथ स्वागत में खड़े दिखाई दिए—जिससे निरीक्षण की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि यह दौरा महज औपचारिकता बनकर रह गया, क्योंकि पूर्व सूचना के चलते अस्पताल प्रशासन ने पहले ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली थीं। इससे पहले भी जिला कलेक्टर और अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वारा किए गए कई निरीक्षण ‘औचक’ बताए गए, लेकिन हर बार कर्मचारी पहले से मौजूद मिले—जिससे पूर्व सूचना की आशंका और गहरी होती गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब निरीक्षण से पहले ही सूचना लीक हो जाती है, तो सरकार के निर्देशों की मंशा कैसे पूरी होगी? क्या ये निरीक्षण केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गए हैं? या फिर जिम्मेदारों को बचाने के लिए वास्तविक स्थिति को ढकने की कोशिश हो रही है?
यदि ‘पूर्व सूचना वाले औचक निरीक्षण’ की यही परंपरा चलती रही, तो सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और आमजन को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलना कैसे सुनिश्चित होगा—यह प्रश्न अब जिले में गूंजने लगा है।
औचक निरीक्षण या पूर्व-तैयार दौरा? चित्तौड़गढ़ में सरकारी जांच पर उठे सवाल
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