आकाशवाणी जयपुर परिसर में हरे-भरे पुराने वृक्ष की कटाई पर उठे सवाल 37 वर्षों से जुड़े कर्मचारी ने जताया दुःख, CCTV फुटेज सुरक्षित करने व कार्रवाई की मांग

pnpandey

जयपुर।
आकाशवाणी जयपुर परिसर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार दिनांक 01 दिसंबर 2025 को सायंकालीन ड्यूटी पर पहुंचे एक वरिष्ठ कर्मचारी ने गार्ड रूम के पास स्थित पार्किंग द्वार पर लगे हरे-भरे, पुराने, विशाल और स्वस्थ वृक्ष को पूर्णतः कटा हुआ पाया। इस घटना के बाद परिसर में कार्यरत कर्मचारियों व पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष एवं दुःख व्याप्त है।
पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि उनका आकाशवाणी जयपुर से लगभग 37 वर्षों से जुड़ाव रहा है, जबकि यह वृक्ष उससे भी पहले से परिसर में लहलहा रहा था। यह वृक्ष न केवल छाया और हरियाली का प्रतीक था, बल्कि पूरे परिसर के पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। ऐसे में बिना किसी सार्वजनिक सूचना या कारण के इस वृक्ष को काट दिया जाना अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है।
कर्मचारी ने इस संबंध में प्रबंधन से मांग की है कि पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए, संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए तथा उसकी एक प्रति उन्हें भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वृक्ष किसके आदेश पर और किस परिस्थिति में काटा गया। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में परिसर में स्थित अन्य हरे-भरे वृक्षों की कटाई न की जाए।
प्रबंधन की मनमानी या अनुमति?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने पुराने और स्वस्थ वृक्ष की कटाई क्या परिसर प्रबंधक की मनमानी से हुई या किसी सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति से? यदि अनुमति थी तो वह किस नियम और किस आधार पर दी गई? अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
किन नियमों के तहत हो सकती है कार्रवाई
विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान में वृक्षों की कटाई राजस्थान वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1973 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत नियंत्रित है। इन नियमों के तहत किसी भी सार्वजनिक या सरकारी परिसर में स्थित हरे-भरे वृक्ष को काटने से पूर्व—
सक्षम वन विभाग/नगर निकाय से लिखित अनुमति आवश्यक होती है,
वृक्ष की स्थिति, आयु और कारण का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य होता है,
बिना अनुमति कटाई पाए जाने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध जुर्माना, विभागीय कार्रवाई एवं पर्यावरण क्षति की भरपाई का प्रावधान है।
यदि यह सिद्ध होता है कि वृक्ष बिना वैधानिक अनुमति के काटा गया है, तो परिसर के जिम्मेदार प्रबंधक अथवा आदेश देने वाले अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई, आर्थिक दंड एवं पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का मामला बन सकता है।
अब देखना यह है कि आकाशवाणी जयपुर प्रबंधन इस गंभीर प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और क्या पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।

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