RTI मामलों में टालमटोल और खामोशी—DEO की कार्यशैली पर सवाल**
बांसवाड़ा।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र चौबीस की सेवानिवृत्ति के साथ ही शिक्षा विभाग में कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब आज भी फाइलों में कैद हैं। RTI कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सेवा निवृत्ति से ठीक पहले विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों और दस्तावेज़ों को जानबूझकर “इधर-उधर” कर सच्चाई को दफन करने का प्रयास किया गया।
सूत्रों के अनुसार, कार्यकाल के दौरान कई मामलों में जांच के आश्वासन दिए गए, समितियों के गठन की घोषणाएं हुईं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो जांच आगे बढ़ी और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई। कई समितियां आज भी “ठंडे बस्ते” में पड़ी हुई हैं।
RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकारी को शुरुआत में एक योग्य और निष्पक्ष प्रशासक के रूप में देखा गया था, लेकिन समय के साथ उनकी कार्यशैली पर टालमटोल, एकतरफा संरक्षण और फाइल प्रबंधन के आरोप लगने लगे। कई बार सूचना मांगने पर मौखिक आश्वासन तो मिला, लेकिन लिखित रूप में जवाब देने से परहेज़ किया गया।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सेवानिवृत्ति से पहले कुछ संवेदनशील फाइलों को इस तरह से व्यवस्थित किया गया, जिससे भविष्य में उनकी जवाबदेही तय करना कठिन हो जाए। हालांकि, RTI कार्यकर्ताओं का साफ कहना है—
“कागज़ कभी मरता नहीं है। अधिकारी चला जाता है, लेकिन दस्तावेज़ सच्चाई बयान करते हैं।”
(क्रमशः दो जरूर पढ़िएगा
PART-1 **सेवानिवृत्ति से पहले फाइलें “दफन” करने की कोशिश?
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