सज्जनगढ़ में जॉइनिंग नहीं, फिर भी बिना जांच कार्यमुक्ति—कमीशनखोरी के गंभीर आरोप**
बांसवाड़ा।
जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) कार्यालय बांसवाड़ा में चल रहे प्रशासनिक खेल की परतें अब एक-एक कर खुलती जा रही हैं। कनिष्ठ सहायक बुद्धि प्रकाश तिवारी से जुड़े मामले में सबसे बड़ा और गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि उसे सज्जनगढ़ ब्लॉक के लिए भेजा गया था, लेकिन उसने वहां जाकर आज तक जॉइनिंग ही नहीं दी।
इस संबंध में सज्जनगढ़ के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रूप जी बारिया ने दिनांक 12 दिसंबर 2025 को ही पत्र क्रमांक 457 के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) को लिखित शिकायत भेज दी थी। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि संबंधित कर्मचारी ने सज्जनगढ़ में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
इसके बावजूद, चौंकाने वाली बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी जगदीश पुरोहित ने इस शिकायत पर कोई जांच नहीं करवाई, न ही कर्मचारी से जवाब तलब किया। उल्टा, विभागीय सूत्रों के अनुसार, “किसी के कहने पर” और “गांधीजी की मदद से” (अर्थात कथित सिफारिश/दबाव के आधार पर) उसे कार्य मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।
यह पूरा घटनाक्रम विभाग में गहरे असंतोष का कारण बन गया है। विभाग के भीतर यह चर्चा आम है कि यहां काम नहीं, केवल पैसे का खेल चल रहा है। नियम, आदेश और जवाबदेही सब कुछ कथित सौदेबाजी के आगे बौने नजर आ रहे हैं।
सबसे गंभीर प्रश्न यह उठ रहा है कि—
जब सज्जनगढ़ में जॉइनिंग नहीं दी गई थी, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की लिखित शिकायत को क्यों नजरअंदाज किया गया?
बिना जांच और बिना तथ्यों के कार्यमुक्ति का आदेश किस आधार पर दिया गया?
विभागीय गलियारों में अब यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि जगदीश पुरोहित इस प्रकार के निर्णय किसके कहने पर और किसके इशारे पर ले रहे हैं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि कमीशनखोरी का खेल इतना गहरा है कि उसकी आंच निर्णय लेने वाले अधिकारियों तक भी पहुंच रही हो? सूत्रों का कहना है कि पूरे प्रकरण में जिस तरह से आदेश बदले गए, बहाली-कार्य मुक्ति का खेल हुआ और शिकायतों को दबाया गया, उससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि पैसे का प्रवाह ही प्रशासनिक फैसलों की दिशा तय कर रहा है।
शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में इस प्रकार की कार्यप्रणाली न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और आम जनता के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है। अब यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे एलिमेंट्री शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल बन चुका है।
जानकारों का कहना है कि यदि जिला कलेक्टर, शिक्षा सचिव और सतर्कता विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कराते हैं, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
बांसवाड़ा शिक्षा विभाग में ‘पोस्टिंग–कार्य मुक्ति’ का बड़ा खेल
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