बांसवाड़ा। शिक्षा विभाग में प्रशासनिक अनुशासन एवं आदेशों की पालना को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। संयुक्त निदेशक (जेडी) कार्यालय द्वारा 20 तारीख को जारी आदेशों की आज दिनांक तक प्रभावी अनुपालना नहीं होना विभागीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार संबंधित प्रकरण में बुद्धि प्रकाश को रिलीव करने हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, किंतु जिला स्तर पर उन आदेशों का क्रियान्वयन लंबित रखा गया। यदि यह तथ्य सत्य पाए जाते हैं तो यह आचरण न केवल सेवा नियमों के विपरीत है, बल्कि वरिष्ठ प्राधिकारी के वैध आदेश की अवज्ञा की श्रेणी में भी आ सकता है।
पूर्व में संबंधित कर्मचारी को एपीओ किए जाने के बावजूद बिना विधिवत जांच पुनः उसी पद एवं उसी स्थान पर पदस्थापित किया जाना प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा रहा है। साथ ही जिन अभिलेखों को शासन निर्देशानुसार सील किया जाना था, उनके नियंत्रण एवं संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
संभावित कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई
यदि प्रथम दृष्टया यह सिद्ध होता है कि जिला शिक्षा अधिकारी (Elementary) स्तर पर जानबूझकर आदेशों की पालना में विलंब अथवा अवहेलना की गई है, तो निम्न प्रकार की कार्रवाई संभव है—
राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 (CCA Rules) के अंतर्गत
कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice)
स्पष्टीकरण मांगना
विभागीय जांच (Departmental Enquiry)
निलंबन (Suspension) की कार्यवाही, यदि प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही/दुराशय सिद्ध हो
वेतनवृद्धि रोकना, प्रतिकूल प्रविष्टि, पदावनति अथवा सेवा से पृथक्करण तक की दंडात्मक कार्रवाई
वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश की अवज्ञा (Insubordination)
सेवा आचरण नियमों के तहत इसे कदाचार (Misconduct) माना जा सकता है।
रिकॉर्ड के संरक्षण में लापरवाही
यदि अभिलेखों को सुरक्षित रखने एवं सील करने संबंधी निर्देशों की अवहेलना पाई जाती है, तो यह प्रशासनिक उत्तरदायित्व का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
वित्तीय/सेवाकालीन लाभों में अनियमितता की जांच
यदि 9, 18 एवं 27 वर्ष की सेवा लाभ स्वीकृति में नियमविरुद्धता पाई जाती है, तो संबंधित प्रकरण की ऑडिट जांच, पुनर्मूल्यांकन एवं वसूली (Recovery) तक की कार्यवाही संभव है।
राज्य स्तर पर अनुशासनात्मक संज्ञान
मामला निदेशक, शिक्षा विभाग अथवा शासन स्तर पर संदर्भित कर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा सकती है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मत है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों को जिला स्तर पर क्रियान्वित नहीं किया जाता, तो यह शासन की नियंत्रण प्रणाली को कमजोर करने जैसा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग नियमानुसार पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेगा या मामला उच्च प्रशासनिक एवं न्यायिक मंच तक पहुंचेगा। शिक्षा विभाग की साख और जवाबदेही इस प्रकरण में परीक्षा की घड़ी से गुजर रही है।
संयुक्त निदेशक के आदेशों की अवहेलना! जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर उठे गंभीर कानूनी प्रश्न
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