एएमयू में इमैनुएल कांत की 300वीं जयंती पर दार्शनिक व्याख्यान श्रृंखला आयोजित

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एएमयू में इमैनुएल कांत की 300वीं जयंती पर दार्शनिक व्याख्यान श्रृंखला आयोजित

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांत की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक ऑनलाइन दार्शनिक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। इस शृंखला में देशभर से विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. आमिर रियाज के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कांत के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके दर्शन ने आधुनिक पश्चिमी चिंतन को एक नई दिशा प्रदान की।

मुख्य वक्ता प्रो. प्रियदर्शी जेटली, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में प्रोफेसर रह चुके हैं, ने “कांत के श्रेणीबद्ध योगदान को समझना” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कांत का नैतिक दर्शन व्यक्ति की आंतरिक विवेकशीलता पर आधारित है, न कि किसी बाहरी आदेश पर। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कांत की अवधारणाओं को अक्सर सतही तौर पर लिया जाता है, जबकि उनमें गहरी दार्शनिक अंतर्दृष्टि समाहित है।

व्याख्यान के बाद एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने दर्शनशास्त्र के गूढ़ पहलुओं पर गंभीरता से चर्चा की। इस सत्र का संचालन डॉ. शाहिदुल हक ने किया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम का समन्वयन भी संभाला।

समापन सत्र में डॉ. अकील अहमद ने कांत के दर्शन को उसके ऐतिहासिक, बौद्धिक और नैतिक संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में डॉ. बोधेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी वक्ताओं और सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

इस व्याख्यान श्रृंखला ने कांत के विचारों को पुनः केंद्र में लाते हुए विद्यार्थियों और विद्वानों को चिंतन और विमर्श का एक प्रेरक मंच प्रदान किया।

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