जयपुर/बीकानेर।
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी आदेश के तहत राज्य के 810 छात्र-छात्राओं और 108 शिक्षकों को गुजरात के राजकोट जिले के प्रांसला (उपलेटा) में आयोजित होने वाले 26वें ‘राष्ट्रीय कथा शिविर’ में भेजने का निर्णय लिया गया है। यह शिविर 27 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक चलेगा �।
पढ़ाई नहीं, ‘कथा’ प्राथमिकता?
जब राज्य के सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी, गिरते परीक्षा परिणाम, बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं, उसी समय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र के बीच 9 दिनों तक कक्षा से बाहर भेजने का निर्णय कई सवाल खड़े कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि वैचारिक एजेंडा थोपने जैसा है।
निजी ट्रस्ट, सरकारी छात्र
दस्तावेज़ों के अनुसार, शिविर का आयोजन श्री वैदिक मिशन ट्रस्ट, राजकोट (गुजरात) द्वारा किया जा रहा है, जो एक निजी संस्था है। सवाल यह है कि
क्या सरकारी स्कूलों के बच्चों को निजी ट्रस्ट के कार्यक्रमों में भेजना अनिवार्य किया जा सकता है?
क्या इसके लिए अभिभावकों और समाज की व्यापक सहमति ली गई? �
₹150 पंजीकरण शुल्क भी तय
आदेश में प्रति विद्यार्थी/शिक्षक ₹150 पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। ऐसे में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि
क्या पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त खर्च थोपना उचित है? �
स्कूल या राजनीति का अखाड़ा?
शिक्षाविदों और अभिभावकों का आरोप है कि
“अब बस यही बाकी रह गया है… सरकारों ने स्कूलों को राजनीति का अड्डा बना दिया है।”
उनका कहना है कि संविधान, विज्ञान, गणित और भाषा शिक्षा को मजबूत करने के बजाय छात्रों को ऐसे आयोजनों में भेजना शिक्षा के मूल उद्देश्य से भटकाव है।
प्रशासन की दलील
विभागीय दस्तावेज़ों में शिविर को राष्ट्रीय चेतना, संस्कृति और सर्वांगीण विकास से जोड़कर बताया गया है और इसे सक्षम स्तर से अनुमोदित बताया गया है �।
लेकिन सवाल अब भी कायम है—
बुनियादी शिक्षा या वैचारिक प्रशिक्षण?
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाली के बीच यह फैसला शिक्षा सुधार के बजाय राजनीतिक प्राथमिकताओं को उजागर करता है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस आलोचना पर क्या जवाब देती है या फिर स्कूलों को इसी तरह प्रयोगशाला बनाकर इस्तेमाल किया जाता रहेगा।
सरकारी स्कूल बने वैचारिक प्रयोगशाला? 810 विद्यार्थियों को ‘कथा शिविर’ में भेजने का आदेश, शिक्षा पर राजनीति थोपने का आरोप
Leave a Comment
Leave a Comment

