सतीश पूनियां ने डूंगरपुर के म्याला में ‘श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ’ में सम्मिलित होकर महाराज श्री उत्तम स्वामी का आशीर्वादलिया

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डॉ. सतीश पूनियां ने माँ त्रिपुरा सुंदरी  के दर्शन कर लिया आशीर्वाद, कहा, सत्यमेव-जयते
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सतीश पूनियां ने डूंगरपुर के म्याला में ‘श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ’ में सम्मिलित होकर महाराज श्री उत्तम स्वामी का आशीर्वाद लिया, कहा, जनजाति के लोगों से प्रकृति के संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया को सीखना चाहिए
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बांसवाड़ा, डूंगरपुर, 13 अप्रैल, 2023। विधानसभा उपनेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने बांसवाड़ा में
माँ त्रिपुरा सुंदरी जी के दर्शन कर पूजा अर्चना की, आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली एवं तरक्की की कामना की।
डॉ. पूनियां ने ट्वीट कर कहा कि,
माँ त्रिपुरा सुंदरी जी के पास अक्सर आता हूँ, वो मुझे ऊर्जा देती हैं, ख़ूब आशीर्वाद भी। संयम, ईमानदारी और परिश्रम जो सामाजिक जीवन से सीखा हमेशा उसके लिए प्रेरित भी करती हैं। कह तो यही रही हैं कि “सत्यमेव-जयते”।

इसके बाद सतीश पूनियां ने डूंगरपुर के म्याला में आसपुर विधायक गोपीचंद मीणा द्वारा आयोजित ‘श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ’ में सम्मिलित होकर महाराज श्री उत्तम स्वामी का आशीर्वाद लिया।
संबोधित करते हुये डॉ. पूनियां ने कहा कि, उत्तम स्वामी महाराज के मुख से हम सभी कथा का आनंद लेते ही हैं,  मेरे सामने जनजाति समाज का वह समूह बैठा है जो धर्म से, नीति से संस्कार से जल, जंगल और जमीन इन सबके संरक्षण के लिए ईश्वर और प्रकृति के सबसे निकट कोई है तो हमारे जनजाति के भाई और बहन हैं।
भारत की सनातन धरती, इसमें इतिहास का, संस्कृति का और विरासत का कोई ओर-छोर नहीं है।
दुनिया के सबसे बड़े पूंजीपति देश की सबसे बड़ी एजेंसी नासा, वह भगवान राम के सेतु के निर्माण और उदगम का शोध करती है तो वह आश्चर्य करती है, कि किस तरीके से धर्म की रक्षा के लिए एक सेतु का निर्माण हुआ और किस तरीके से गिलहरी के योगदान ने भारत की कथाओं में उसको अमर कर दिया।
कथा का श्रवण और उसमें पूज्य गुरुदेव उत्तम स्वामी जैसी विभूति का उद्बोधन सुनना हम सबका सौभाग्य है।
हमने ईश्वर को देखा तो नहीं, लेकिन ईश्वर को हम अनुभूत कर सकते हैं, महसूस कर सकते हैं, उत्तम स्वामी जिस निराले और अनूठे अंदाज में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का जब वर्णन करते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण को महसूस कर सकते हैं।
यहां बड़ी संख्या में मातृशक्ति बैठी है, मैं बहुत बार इस वागड़ क्षेत्र में आया, राजनीति का व्यक्ति हूं लेकिन समाज का भी हिस्सा हूं, एक जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते मन में उत्कंठा रहती है, कि समाज में समरसता बनी रहे, समाज और देश के सामने जो चुनौतियां हैं उनसे सब लोग मिलकर कैसे लड़ें, नई पीढ़ी को कैसे प्रेरणा दें, ताकि वह तनाव से, व्यसन से मुक्त होकर एक अच्छा नागरिक बनें।
मैं जिस जगह पैदा हुआ वह बहुत साधारण किसान का गांव का घर है, राजस्थान के उत्तरी हिस्से में मेरा जन्म हुआ, जहां रेत ही रेत है और यह दक्षिणी हिस्सा जहां पठार ही पठार और पर्वत ही पर्वत हैं, दोनों ही जगह संघर्ष है, अपना अपना।
समाज और देश में किसी भी समाज की उन्नति के लिए शिक्षा सबसे जरूरी महत्वपूर्ण कारक है, मुझे सबसे बड़ी खुशी होती है जब यहाँ बेटियाँ शिक्षा के प्रति जागरूक होकर स्कूल जाती हैं।
लगभग 35-40 बरस मुझे याद आते हैं, जब पढ़ता था उस समय से ही इस जनजाति क्षेत्र में आता रहा हूं, तो कोई बेटी यदा-कदा ही स्कूल जाती दिखती थी और आज मुझे प्रसन्नता होती है कि हमारी जनजाति की बेटियां बेटों से भी ज्यादा स्कूल जाती हैं।
देश की हुकूमत भी, देश की सत्ता भी और देश के शीर्ष पर बैठे हुए लोग भी कहते थे कि, बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ।
गार्गी, मैत्रेयी के इस देश में, सदियों से नारियों की पूजा करने के लिये संकल्पित इस देश में, एक बेटी पढ़ेगी तो दो घरों को संस्कारित करेगी और  मुझे लगता है कि पूरी संस्कृति को बचाने में उन दो घरों से निकली हमारी बेटियां, संस्कृति को भी बचाएंगी और प्रकृति को भी बचाएंगी।
पूज्य गुरुदेव ने जो धर्म और अध्यात्म की जो ध्वजा को थामा है, केवल कर्मकांड से ही नहीं, पूज्य स्वामी ने धर्म को समाज से जोड़ा है, आम आदमी से जोड़ा है, एक सामान्य जनजाति के गरीब व्यक्ति से जोड़ा है।
और इसलिये जोड़ा है कि जो चुनौतियां हैं, पृथ्वी भी बचानी है, जल भी बचाना है, पेड़ भी बचाने हैं, तो हमारे यहां कहा जाता है कि एक पेड़ सौ पुत्रों के समान है, प्रकृति तो तभी बचेगी तो जब पेड़ बचेंगे और वृक्ष बचेंगे।
सरकार भले ही नारे लगाती हो, लेकिन जिस तरीके से जनजाति के लोग प्रकृति का संरक्षण करते हैं, उसको पूरी दुनिया को सीखना चाहिए।
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