महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस: फडणवीस के समर्थन में आरएसएस, जातिगत समीकरणों पर भाजपा में मतभेद
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद पर फैसला अब तक अधर में लटका हुआ है। हालांकि शपथ ग्रहण की तारीख नजदीक है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा, यह तय नहीं हो सका है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनावी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देवेंद्र फडणवीस को ही मुख्यमंत्री बनाया जाए।
आरएसएस ने न केवल फडणवीस के नेतृत्व की प्रशंसा की, बल्कि भाजपा को यह भी चेतावनी दी है कि अगर जातिगत समीकरणों के आधार पर अन्य किसी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तो पार्टी को आगामी चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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आरएसएस की स्पष्ट राय: फडणवीस बनें सीएम
महाराष्ट्र चुनाव के दौरान संघ ने देवेंद्र फडणवीस के पक्ष में जबरदस्त प्रचार किया। संघ के सूत्रों के अनुसार, करीब 3,000 स्वयंसेवकों ने हर जिले में अभियान चलाया और महायुति की जीत सुनिश्चित की। संघ का मानना है कि फडणवीस ने न केवल अपनी रणनीतिक कौशल से चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित की, बल्कि विपक्ष को भी कमजोर किया।
संघ के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि फडणवीस ने भाजपा और महायुति के बीच तालमेल बिठाकर स्थिरता सुनिश्चित की। इसके अलावा, उनका ब्राह्मण समुदाय से होना और प्रशासनिक अनुभव उन्हें स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद का सबसे योग्य दावेदार बनाता है।
जातिगत समीकरणों से जटिलता
भाजपा के भीतर जातिगत समीकरणों को लेकर भी चर्चा चल रही है।
मराठा उम्मीदवारों में विनोद तावड़े, चंद्रकांत पाटिल, और मुरलीधर मोहोल जैसे नाम शामिल हैं।
ओबीसी वर्ग से चंद्रशेखर बावनकुले का नाम चर्चा में है।
मराठा और ओबीसी समुदायों ने भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई है। कुछ नेताओं का तर्क है कि इन समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भाजपा के लिए आगामी चुनावों, विशेष रूप से बीएमसी चुनाव, में फायदेमंद रहेगा।
संघ की नाराजगी: जाति के आधार पर फैसला क्यों?
आरएसएस ने भाजपा के नेताओं से साफ कहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए जातिगत समीकरण प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए।
संघ का तर्क है कि अजित पवार और एकनाथ शिंदे दोनों ही मराठा समुदाय से आते हैं। ऐसे में भाजपा से एक और मराठा मुख्यमंत्री बनाना व्यावहारिक नहीं होगा।
आरएसएस का कहना है कि जातिगत समीकरणों पर ध्यान देना पार्टी की विचारधारा और चुनावी रणनीति दोनों के खिलाफ है।
दावेदारों के बयान और स्थिति
संघ के कड़े रुख के बाद, अन्य संभावित दावेदार स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।
मुरलीधर मोहोल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह अफवाह है कि मैं मुख्यमंत्री पद का दावेदार हूं। हमारी पार्टी में ऐसे फैसले संसदीय बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं, न कि अफवाहों और सोशल मीडिया चर्चाओं से।”
चंद्रशेखर बावनकुले ने भी कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होगा।
भविष्य की राह: भाजपा के लिए कठिन निर्णय
मुख्यमंत्री के चयन को लेकर आरएसएस और भाजपा के भीतर मतभेदों ने स्थिति जटिल बना दी है।
1. फडणवीस की दावेदारी मजबूत है क्योंकि वे भाजपा के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं और उनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत है।
2. जातिगत समीकरणों पर जोर देने से भाजपा को आंतरिक असंतोष और बाहरी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
3. संघ का स्पष्ट रुख फडणवीस के पक्ष में है, और संघ के सहयोग के बिना भाजपा के लिए राज्य में स्थिर सरकार चलाना मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष: संघ का दबाव निर्णायक हो सकता है
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस से भाजपा और संघ के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है। संघ का मानना है कि फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा के लिए दीर्घकाल

