बांसवाड़ा, 2 जनवरी। मकर संक्रांति के दौरान होने वाली पतंगबाजी को सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. इन्द्रजीत यादव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर धातु, नायलॉन, प्लास्टिक तथा चाइनीज मांझे सहित सिंथेटिक/टॉक्सिक सामग्री (आयरन पाउडर, ग्लास पाउडर आदि) से बने मांझे की थोक व खुदरा बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
आदेश के अनुसार पक्षियों की आवाजाही के समय — सुबह 6 से 8 बजे और शाम 5 से 7 बजे — पतंग उड़ाना भी प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध 20 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगा।
कलक्टर ने बताया कि धातु मिश्रित मांझा बेहद धारदार होने के साथ-साथ विद्युत का सुचालक भी होता है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों, पक्षियों और पतंग उड़ाने वालों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। विद्युत तारों से संपर्क होने पर बिजली आपूर्ति बाधित होने और हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर खंडपीठ ने भी अपने आदेश में ऐसे हानिकारक धागों के उपयोग को अनुमति नहीं दी है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहार के दौरान सुरक्षित पतंगबाजी करें और जारी निर्देशों का पालन कर दुर्घटनाओं से बचें।
मकर संक्रांति पर प्रशासन सख्त: धातु व प्लास्टिक निर्मित मांझे की बिक्री-उपयोग पर प्रतिबंध
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