भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना गरीबों के लिए गरीबों के कल्याण के लिए बनाई गई थी उसका फायदा अमीरो ने वह अस्पताल ने उठाया

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 मेवाड़ हॉस्पिटल द्वारा लिखा गया लेटर

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  •  भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना गरीबों के लिए गरीबों के कल्याण के लिए बनाई गई थी योजना सरकार का मुख्य उद्देश्य था कि इस योजना के अंतर्गत गरीब जनता को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का फायदा मिल सके इसके अंतर्गत 1715 बीमारियों का इलाज किया जाना था इसमें डॉक्टर की फीस से लेकर दवाई तक का खर्चा राज्य सरकार वहन करती इस योजना के अंतर्गत कहीं पर भी  यह अंकित नहीं किया गया था कि इतने दिन के अंदर कितने घंटे के अंदर आपको आईडी जनरेट करनी है  लेकिन डॉ विनीता त्रिवेदी  अपने निजी स्वार्थ को देखते हुए  उन्होंने  जितने भी प्राइवेट हॉस्पिटल है उनके अंदर  उन्होंने  अपनी कमीशन फिक्स कर रखी थी  तथा  वह सीएमएचओ से तो झूठ बोलती ही बोलती थी  लेकिन मुख्यमंत्री महोदय तक भी इनके झूठ  बोलने की आदत पड़ गई  इसका पर्दाफाश  हमने जब किया कि जब  इस योजना के अंतर्गत  एक व्यक्ति  के बच्चे का पैर टूट चुका था  तथा वह  भामाशाह योजना के अंतर्गत मेवाड़ हॉस्पिटल में  अपने बच्चे का इलाज कराने गया और वहां उसने  प्रकाश का कहना है कि वहां पर  50 से ₹55 हजार रूपये  खर्च किए  और  बच्चे की जान बचाई  मेवाड़ हॉस्पिटल प्रशासन एवं मिलीभगत से  उस व्यक्ति को  अपनी जेब से पैसे लगाने पड़े  जब उसको  खबरें खटाखट की टीम में  बताया कि  आपको  भामाशाह योजना के अंतर्गत  आप को  खर्च कीया गया रुप या   मिल  सकता है  तब उसने  मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत 11200538943472  दुर्भाग्यवश  जांच करने जाने वाले टिम मे   कोई    औरनहीं डॉ विनीता त्रिवेदी  खुद की तथा उन्होंने मेवाड़ हॉस्पिटल में जाकर के  अपने प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लाभ को ध्यान में रखते हुए  उन्होंने मेवाड़ हॉस्पिटल से सांठगांठ की  तथा  प्रकाश से उन्होंने एक लेटर लिखवाया  जो ऊपर लेटर अंकित है  उन्होंने इसमें लिखा कि  मेरा जितना भी  खर्चा हुआ है हॉस्पिटल में वहन कर लिया है  मुझे आप कोई शिकायत नहीं है मैं अपनी शिकायत वापस लेता हूं  तब प्रकाश शर्मा ने कहा कि महोदय मुझे तो आपने पैसा दिया ही नहीं  और आप इस प्रकार के लेटर लिख रही हैं  तब द्विवेदी ने कहा  कि यह पैसे लेने है तो ले लो अन्यथा तुम हमारा कुछ भी नहीं कर सकते हो  और जो पैसे देने की बात हुई थी वह पैसे भी उन्होंने उसको नहीं दिए  मेवाड़ हॉस्पिटल प्रशासन तथा डॉ विनीता ने उसे डराया धमकाया  और वहां से  भगा दिया  मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो  डॉक्टर दीपक   वहां पर जांच करने गए  उससे पूर्व में ही  डॉ विनीता त्रिवेदी ने वहां पर  अपनी कारस्तानी करवा चुकी थी  उन्होंने मरीज के फार्म के अंदर  बदलाव करा दिया था  उन्होंने बताया था कि  मैंने स्वघोषणा पत्र देखा था  जिसके अंदर प्रकाश जी के साइन थे  लेकिन जब डॉक्टर दीपक गए  तो वहां पर  प्रकाश शर्मा के साइन ना होकर के  उनकी धर्मपत्नी  मीना के साइन थे  जानकर आश्चर्य जब हुआ कि  की मीना तो अनपढ़ हैं वह साइन करती ही नहीं है बैंकों से भी पैसा हुआ अंगूठे के माध्यम से निकलती हैं  तब वहां पर  हमारे वीडियो सहयोगी  मौजूद थे  उन्होंने सभी बातें  अपने कैमरे में रिकॉर्ड की कथा  डॉ विनीता त्रिवेदी ने कहा  चलिए सर अपन देख लेंगे  अब देख लेने का अर्थ क्या था  या आप खुद समझ सकते हैं   आपको इतना बता दे कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर एक नहीं इनके अनेकों शिकायतें दर्ज हैं और जिस में स्पष्ट कहा गया था कि मान्यवर डॉ विनीता त्रिवेदी को उसका जांच अधिकारी ना बनाया जाए लेकिन जब डॉक्टर दीपक वहां गए तो उनसे भी यह माना जा सकता है या तो भूल थी या इनकी मिलीभगत थी उन्होंने डॉ विनीता त्रिवेदी को फोन करके बुलाया तथा समस्त दस्तावेज डॉक्टर विनिता त्रिवेदी को दिखाएं एवं शिकायत कर्ताओं की शक्ल भी डॉक्टर दीपक ने दिखाई कि इन व्यक्तियों ने आपकी शिकायत की है डॉ विनित त्रिवेदी अपना रुतबा इस प्रकार काम करते हैं कि कोई भी अधिकारी इनके खिलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं है या तो वह अधिकारी इन से डरते हैं या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष अपना लाभ लेते हुए अपने जिस कुर्सी के ऊपर सुशोभित हैं उस कुर्सी को बदनाम कर रहे हैं गरीब का पैसा खा कर के कोई आज तक धनवान नहीं बना है लेकिन यह सब बातें कहने और सुनने में अच्छी लगती हैं हकीकत में तो आप देख लो जो व्यक्ति इस पद के योग्य भी नहीं है वह आज लंबी लंबी गाड़ियों में घूम रही है
  • प्रकाश को आज तक रुपये  नही मिले  और जो प्रकाश से जो लेटर लिखवाया गया था उस लेटर का हवाला देते हुए उन्होंने उस केस को वहीं उन्हें दबा दिया   गया एक केस नहीं ऐसे अनेकों केस है जो डॉक्टर विनीता   के उपर मुख्य मंत्री  पोटल पर  दर्ज  है   सवाल यह उठता है कि  क्या प्रशासन को पता नहीं है  क्या सीएमएचओ को पता नहीं है  कि क्या इनका भी कमीशन  बंधा हुआ है  जब डॉक्टर दीपक  डॉक्टर विनीता त्रिवेदी एवं अन्य व्यक्ति जब वहां  थे तो मेवाड़ हॉस्पिटल ने इनके सामने कहा कि मैंने भामाशाह योजना के अंतर्गत  1 वर्ष पूर्व ही मैंने यह योजना का  लाभार्थियों को लाभ देना बंद कर दिया है  मैं किसी प्रकार का कोई इलाज नहीं करता हूं  जो कि डॉ विनिता त्रिवेदी  इन सभी हॉस्पिटलों की  देखरेख  एवं स्वास्थ संबंधी योजना का  देखने का कार्य डॉक्टर विनित त्रिवेदी के पास था डॉक्टर विनित त्रिवेदी को यह नहीं मालूम था कि मेवाड़ हॉस्पिटल भामाशाह योजना के अंतर्गत इलाज नहीं करता है यदि मालूम था तो उन्होंने राज्य सरकार को भ्रमित किया सीएमएचओ को भ्रमित क्यों किया  सवाल यह भी उठता है कि  जब मेवाड़ हॉस्पिटल  इस योजना के अंतर्गत  उसने आवेदन किया था तो उसको नियमानुसार  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को लिखित में देना चाहिए था एवं जिला प्रशासन को लिखित में देना चाहिए था कि मान्यवर में भामाशाह योजना के अंतर्गत कार्य करने में सक्षम नहीं हूँ  तथा  मुझे इस योजना के अंतर्गत चयनित हॉस्पिटल में से  मेरा नाम काटा जाए   दिया जाए हटा दिया जाए लेकिन ना ही उसने किया  और ना ही चिकित्सा विभाग ने अपनी  काया को कष्ट दिया कि वह मालूम कर सके 1 साल से योजना का लाभ लोगों को नहीं दे रहा है तो उसके ऊपर कोई कानूनी कार्रवाई की जाए   उसको चाहिए था क्यों की  चयनित हॉस्पिटल में भामाशाह योजना के अंतर्गत मेवाड़ हॉस्पिटल का नाम  अंकित है  और उसने 5 मार्च  किसी भी प्रकार से कोई लेटर प्रस्तुत नहीं किए थे कि मैं इस योजना के अंतर्गत  लोगों का इलाज नहीं करूंगा  हद तो तब हो गई जब खुद कह रही हैं  कि मैंने स्वघोषणा पत्र खुद ने देखा था उसने प्रकाश  हस्ताक्षर थे    सवाल यह उठता है कि जब विनीता त्रिवेदी ने प्रकाश जी के  हस्ताक्षर देखे थे  तो   व् हा उनकी पत्नी साइन कहां  से आये   मीना  के साइन किसने की और क्यों किया  दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली है ऐसा नहीं है  कि इन लोगों को इस बारे में जात नहीं है  लेकिन ऊपर से नीचे तक सभी के कमीशन बंधे हुए हैं लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है  गरीब के हक की रोटी या अमीर लोग खाए जा रहे हैं यदि कोई आवाज उठाता है तो उसकी आवाज दबा दी जाती है 181 पर शिकायत करने के बावजूद भी  3 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं होती है मुख्यमंत्री की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है  एवं प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है कि इस प्रकार से भ्रष्टाचार हो रहा है  या तो यह मान लिया जाए कि यह सब इनकी मिलीभगत के कारण हो रहा है  सीएमएचओ एवं
  • ( जांच अधिकारी डॉक्टर दीपक)
    प्रशासन की गलती के चक्कर में ही आज महामारी में लोग बाग दर्द के लिए हैं भटक रहे हैं  इन्होंने अपने निजी स्वार्थ को देखते हुए  हॉस्पिटलों को खोलने के परमिशन दी  जब इस संबंध में इनसे पूछा जाता है कि अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कहते हैं यह परमिशन यहां से नहीं वहां से मिलती है  सूचना का अधिकार लगाने के बावजूद भी  इनके कानों में कोई जू  नहीं  रेंग्ती है यह किसी प्रकार की सूचना देने से  बच ते  रहते हैं  आप और हम को ही मिल कर के  इस भ्रष्टाचार को उजागर करना होगा इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी  आज प्रकाश के साथ हुआ है कल आपके साथ होगा कल आपके पड़ोसी के साथ होगा  तो आप इसी प्रकार से हाथ पर हाथ धरे बैठे रह जाएंगे तो डॉक्टर विनिता    जो  इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं है  तो भी अपनी राजनीति पहुंच के कारण  इस पद की गरिमा को  धूमिल कर रही हैं  एवं लोगों के स्वास्थ्य के साथ में  खिलवाड़ कर रही हैं प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रही हैं  ऊपर से नीचे तक पूरे कुएं में भांग घुली पड़ी है  क्या मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को यह ज्ञात नहीं है कि जिसके खिलाफ शिकायत की गई है  उसी व्यक्ति को  उसका जांच अधिकारी बनाते हैं  यह तो वह बात हो गई  किस चोर को कह दो  कि तू अपना न्याय  खुद कर ले  तो चोर अपने आपको चोर कभी नहीं कहेगा वही हालत हो रही है चिकित्सा विभाग की  जो डॉक्टर त्रिवेदी को जानते हुए पहचानते हुए कि हां उन्होंने भ्रष्टाचार किया है उसके बावजूद भी  चिकित्सा विभाग मौन बनकर बैठा हुआ है आंखों में  धृतराष्ट्र की  पट्टी लगी हुई है  इस की  भी दो  वजह हो  सकते हैं  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  हो सकता है कि कमीशन बंदा हो या फिर उनके ऊपर कोई राजनीतिक दबाव हो  तभी तो वह इस प्रकार के निर्णय बचकाना निर्णय लेते हैं कि उन्हीं को जांच अधिकारी बना देते हैं  1715 बीमारियों का इलाज इस योजना के अंतर्गत किया जाना था  डाक्टर  त्रिवेदी  कहती है कि   आईडी जनरेट करने का लिमिट  समय होता हे   इसलिए उनको भामाशाह योजना का लाभ नहीं मिला  मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी झूठ बोलती हैं कि इमरजेंसी सेवाओं के लिए  गए थे इसलिए इनको भामाशाह का लाभ नहीं मिला  आदमी इमरजेंसी में हीहॉस्पिटल  जाता है कोई घूमने फिरने के लिए हॉस्पिटल नहीं जाता है  आप जाति हम घूमने फिरने के लिए आपके कमीशन वह पैसा लेने के लिए लेकिन बांसवाड़ा की कोई भी जनता हॉस्पिटल घूमने फिरने नहीं जाती है अपना इमरजेंसी में इलाज कराने ही जाती है  यह अपने नियम कायदे कानून खुद बनाते हैं इनको खुद को नहीं मालूम है की आईडी कितनी देर में   आईडी जनरेट करने  करनि हे 

राजस्थान सरकार ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना प्रारंभ की है. भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सरकार का जोर लोगों का स्वास्थ्य सुविधाएं देने पर है. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलती है. यह योजना 13 दिसंबर 2015 को शुरू की गई थी.

 फाइल  फ़ोटोो डाक्टर  विनिता त्रिवेदी 

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ चुनिंदा निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में भी ये सेवाएं उपलब्ध कराई जाती  थी .

कौन उठा सकता था भामाशाह स्वास्थ्य बीमा का लाभ?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल परिवार इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. इस योजना के लिए राजस्थान का नागरिक होना जरूरी है. इसके साथ ही भामाशाह कार्ड और राजस्थान में निवास का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य था

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भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के फायदे
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष सामान्य बीमारियों के लिए 30 हजार तथा गंभीर बीमारियों के लिए 3 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जा रहा है. अस्पताल में भर्ती के दौरान हुए खर्च के अलावा भर्ती से 7 दिन पहले से 15 दिन बाद तक का खर्च शामिल किया जाता था 

इस योजना में 1715 बीमारियों को शामिल किया गया है. इनके अतिरिक्त नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी तथा मनोरोग सहित 300 से अधिक स्पेशियलिटी उपचार भी शामिल हैं. 

इससे पहले चल रही योजनाओं में केवल दवाइयां और जांच ही कैशलेस मिलती थीं. लेकिन अब भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में जांच, इलाज, डॉक्टर की फीस, ऑपरेशन आदि सब शामिल किये गए हैं. इसके अलावा सरकार द्वारा ओ.पी.डी. व कैशलेस दवाओं के वितरण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है.

राजस्थान की यह स्वास्थ्य बीमा योजना देश के अन्य राज्यों की इस तरह की योजनाओं से बेहतर है. राज्य सरकार का दावा है कि अन्य राज्यों की तुलना में इसमें बीमारियों और जांचों की संख्या अधिक है.

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योजना का लाभ लेना था आसान डॉ विनीता की मिलीभगत के कारण लाभ लेना हुआ मुस्किल 
अस्पताल में भर्ती के समय वहां उपस्थित ‘स्वास्थ्य मार्गदर्शक’ मरीज़ और परिजनों की मदद करते हैं. योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को अपना भामाशाह कार्ड अस्पताल प्रशासन को देना होता है. उसके बाद की सारी प्रक्रिया की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है. परंतु बांसवाड़ा के किसी भी अस्पताल के अंदर इस प्रकार के मार्गदर्शक नहीं बैठे हुए हैं जो  मरीजों को मार्गदर्शन देवें 

   कि सी भी  अस्पताल में अपना मार्गदर्शक नहीं बिठा रखे हैं जिसकी  देख रेख का जिम्मा भी  विनिता त्रिवेदी  के कार्य  के अंतर्गत आता है  क्रियान्वयन के लिए कॉल सेंटर बनाने की प्रक्रिया जारी है. इसके अलावा मोबाइल ऐप द्वारा मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. न्यू इंडिया इन्शोरेंस कम्पनी से इसका अनुबन्ध किया गया
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