बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर कार्यशाला का आयोजन
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और चिकित्सा विभाग के संयुक्त प्रयास
बांसवाड़ा।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट 2016 नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रताप सर्किल स्थित एक होटल में गुरुवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय और चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों और पेशेवरों को प्रशिक्षित किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य और मुख्य बिंदु
कार्यशाला में उपस्थित संभागियों को बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन, नियामकीय अनुपालन, और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का संचालन प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी रवि कुमार चंदेल ने किया। उन्होंने सभी संभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इसके बाद प्रतिभागियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी गई।
चिकित्सा विभाग का सहयोग और विशेषज्ञों का संबोधन
उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राहुल डिंडोर ने चिकित्सा विभाग में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के दौरान ध्यान रखने योग्य बातों को साझा किया।
कार्यशाला में उपस्थित अन्य विशेषज्ञों, जैसे कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सुशीला लबाना, कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता शिव दयाल धाकड़, हर्ष रोत, और चिराग शर्मा, ने अपने-अपने क्षेत्र की विशेष जानकारी दी।
कार्यक्रम में आईडीएसपी सेल से वीरेंद्र सिंह चौहान सहित चिकित्सा क्षेत्र के कई पेशेवर और स्वास्थ्य कर्मी भी मौजूद रहे।
पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग पर विशेष जोर
कार्यशाला में आईईसी (इन्फॉर्मेशन, एजुकेशन और कम्युनिकेशन) के माध्यम से सिंगल-यूज प्लास्टिक के विकल्पों पर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए गए। प्रतिभागियों को बताया गया कि कैसे रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का उपयोग कम किया जा सकता है।
शॉपिंग के लिए कपड़े या जूट के बैग का उपयोग।
पुनः उपयोग में ली जाने वाली पानी की बोतल या टिफिन का उपयोग।
सिंगल-यूज कटलरी का कम उपयोग।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेहतर स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना आवश्यक है।
प्रस्तुत किए गए तथ्य और जागरूकता प्रयास
कार्यशाला के दौरान फोटो और स्लाइड्स के माध्यम से प्रदूषण और पर्यावरण पर इसके प्रभावों को स्पष्ट किया गया।
सिंगल-यूज प्लास्टिक के विकल्प और बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित प्रबंधन पर जोर देकर प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने कार्यस्थलों और व्यक्तिगत जीवन में इन सुझावों को अपनाएं।
कार्यशाला का समापन
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की बारिकियों को समझने में इस कार्यशाला को उपयोगी बताया। यह कार्यशाला चिकित्सा संस्थानों को जिम्मेदारीपूर्वक पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

