स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाए जाने की उठी मांग, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

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स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाए जाने की उठी मांग, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

7 अप्रैल — जन स्वास्थ्य अभियान भारत, राजस्थान नागरिक मंच, मत्स्य मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान और बांगड़ उपभोक्ता संरक्षण समिति, बांसवाड़ा ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खिमसर को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाए जाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की गई है।

इस अभियान से जुड़े प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं—अमिताव गुहा, चंद्रकांत यादव, राही रियाज़, अमूल्य निधि, एस. आर. आज़ाद, महजबीन भट, गौरांग महापात्र, संजीव सिन्हा, अनिल गोस्वामी, कैलाश मीणा, हेमलता कंसोटिया, बसंत हरियाणा, भारत दोसी, डॉ. नरेश पटेल और शाहिद मंसूरी—ने बताया कि ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:

  • स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
  • सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सभी दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
  • जीवन रक्षक व आवश्यक दवाओं पर किसी भी प्रकार का कर न हो।
  • एक ऐसा कानून बनाया जाए जो स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित करे और सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों पर बाध्यकारी हो।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 2.5% किया जाए।
  • राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार कानून 2022 को शीघ्र अधिसूचित कर लागू किया जाए।
  • सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और विस्तारित किया जाए।
  • आशा, एएनएम, नर्स और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए व उनकी कार्य स्थितियों में सुधार किया जाए।
  • राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू किया जाए तथा निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में दर नियंत्रण और मानक उपचार दिशा-निर्देशों को सुनिश्चित किया जाए।
  • स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक कारकों जैसे खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, रोजगार, महिला सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल आदि को सुनिश्चित किया जाए।
  • सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए व्यवसायिक स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी की जाए।

जन संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह नागरिकों को स्वास्थ्य का संवैधानिक अधिकार प्रदान करने की दिशा में ठोस कदम उठाए और इसे कानूनी रूप में लागू करे।


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