निरीक्षण, पत्राचार और RTI से जुड़े मामलों पर सवाल

pnpandey

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली फिर चर्चा में**
बांसवाड़ा।
जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे विभागीय निरीक्षण, पत्राचार, निर्णय प्रक्रिया और सूचना के अधिकार (RTI) के क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं। इन मामलों को लेकर शिक्षा जगत और आमजन के बीच चर्चा तेज हो गई है।
निरीक्षण का समय और रिपोर्ट की स्थिति
सूत्रों के अनुसार जिले के एक कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास का निरीक्षण शाम 6:10 बजे किया गया। जानकारों का कहना है कि निरीक्षण में शामिल अधिकारी वरिष्ठ एवं अनुभवी थे। हालांकि, निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट और निष्कर्षों को लेकर विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
तेजपुर विद्यालय प्रकरण: रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
रिकॉर्ड के अनुसार तेजपुर विद्यालय प्रकरण में गठित निरीक्षण दल में रेखा रोत (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, बागीदौरा) जिनको 5 जुलाई को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी लेकिन उन्होंने 6 तारीख को जिला शिक्षा अधिकारी यदि पुरोहित को पत्र लिखे रहती है कि मुझे इस कार्यक्रम मुक्त किया जाए और जयदीप पुरोहित कर देते हैं फिर सवाल खड़ा होता है कि कार्य अवधि निकल जाने के बाद कार्य मुक्त क्यों किया गयाएवं दूसरी जांच रिपोर्ट में बनाने के लिए माया सैमसंग (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, अरथुना) को शामिल किया गया था। नियमानुसार जांच रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत की जानी थी। विभागीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस संबंध में RTI कार्यकर्ता पूर्णानंद पांडे द्वारा तीन बार सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत कर निरीक्षण की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं। संबंधित कार्यालय से अब तक प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह प्रश्न उठ रहा है कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने में विलंब क्यों हो रहा है।
बुद्धि प्रकाश तिवारी प्रकरण: पत्राचार के बाद लिया गया निर्णय
इसी क्रम में बुद्धि प्रकाश तिवारी से जुड़ा प्रकरण भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें सज्जनगढ़ के लिए एपीओ किया गया था, लेकिन वहां जॉइनिंग नहीं हुई। इसके बाद सज्जनगढ़ के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा दिनांक 12 दिसंबर को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा गया, जिसका पत्र क्रमांक 457 बताया गया है। पत्र में जॉइनिंग की स्थिति से अवगत कराया गया था।
इसके पश्चात जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) जयदीप पुरोहित द्वारा बहाली से संबंधित आदेश जारी किया गया। विभागीय रिकॉर्ड में इस निर्णय से पूर्व किसी औपचारिक बैठक या लिखित प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में जयदीप पुरोहित से पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं एलिमेंट्री की जिला शिक्षा अधिकारी श.फ.ब अंजुम के कहने पर उनको एपीओ किया थाश.फ.ब अंजुम कहने पर ही उनको बहाल कर दिया

कस्तूरबा छात्रावास पर निरीक्षणों को लेकर प्रश्न
सूत्रों के अनुसार 19 दिसंबर को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुशील जैन की शिकायत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बांसवाड़ा दौरे के दौरान की गई थी से संबंधित एक शिकायत के बाद कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास पर निरीक्षणों की संख्या बढ़ी। छात्रावास की प्रधानाचार्य लक्ष्मी कलाल एवं वार्डन ममता करवाई द्वारा RTI के तहत मांगी गई जानकारी में तथ्यात्मक और लिखित जवाब दिए जाने की बात कही जा रही है।
जानकारों का कहना है कि यदि निरीक्षण प्रक्रिया नियमित और समान रूप से लागू हो, तो जिले के अन्य छात्रावासों के निरीक्षण का विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
RTI से जुड़े मामले और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार 30 दिसंबर को जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) श.फ .बा अंजुम से जुड़ा एक मामला सामने आया, जिसमें एक RTI कार्यकर्ता द्वारा FIR की बात कहे जाने को लेकर अपनी सुरक्षा संबंधी आशंका जताते हुए 181 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।
इसके बाद RTI कार्यकर्ता द्वारा यह भी बताया गया कि मामले को लेकर सीडीओ राजेंद्र चौबीस को शिकायत दी गई थी। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हुई मुलाकात के दौरान RTI कार्यकर्ता को यह जानकारी दी गई कि जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। हालांकि, अब तक जांच की प्रगति या निष्कर्ष को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उठ रहे हैं ये सवाल
इन सभी घटनाक्रमों के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ स्वाभाविक प्रश्न खड़े हो रहे हैं—
जब निरीक्षण और जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है?
विभागीय पत्राचार में स्पष्ट स्थिति होने के बावजूद निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए गए?
RTI के तहत मांगी गई सूचनाओं का समयबद्ध निस्तारण क्यों नहीं हो पा रहा?
और क्या जिले में निरीक्षण की प्रक्रिया सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू की जा रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रश्नों पर स्पष्ट, लिखित और सार्वजनिक जानकारी सामने आती है, तो विभाग और आमजन के बीच विश्वास मजबूत होगा। पारदर्शिता और समयबद्ध जवाबदेही से ही शिक्षा विभाग से जुड़े विवादों पर विराम लग सकता है।

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