1दिसम्बर 24
दौसा जिले के सिकराय क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। 9 महीने पहले नाबालिग लड़की के साथ हुई दरिंदगी का दर्दनाक परिणाम तब उजागर हुआ जब शनिवार को पत्थरों के बीच एक नवजात शिशु लावारिस हालत में ठंड से ठिठुरती मिली। घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
घटना का विवरण:
शनिवार सुबह सिकराय के डूंगर इलाके में स्थानीय लोगों ने पत्थरों के बीच एक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनी। मासूम बच्ची ठंड से कांप रही थी और उसे कई जगह चींटियों ने काट लिया था। इस घटना की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन इससे पहले नवजात के परिजन उसे वहां से उठाकर अपने घर ले गए।
पुलिस की जांच में पता चला कि बच्ची को एक 16 वर्षीय नाबालिग ने जन्म दिया था। यह नाबालिग मानपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। पहले तो परिजनों ने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से इनकार कर दिया और बच्ची को अपनाने का निर्णय लिया। लेकिन बाद में, रविवार को नाबालिग के परिजनों ने 9 महीने पहले की दरिंदगी को लेकर नामजद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
दरिंदगी और नवजात की हालत:
पुलिस के मुताबिक, 9 महीने पहले नाबालिग के साथ दरिंदगी हुई थी। इस घिनौने कृत्य का परिणाम नवजात शिशु के रूप में सामने आया। बच्ची को जन्म देने के बाद नाबालिग ने उसे पत्थरों के बीच छोड़ दिया था। नवजात की लावारिस हालत की खबर फैलने के बाद नाबालिग और उसके परिजन उसे अपने घर ले गए।
पुलिस कार्रवाई:
नाबालिग के परिजनों ने रविवार को नामजद आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया। मानपुर थाने के एएसआई फतेह सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
सामाजिक और कानूनी पहलू:
यह घटना समाज को झकझोरने वाली है। एक नाबालिग के साथ दरिंदगी, नवजात को पत्थरों के बीच छोड़ना, और परिजनों का पहले पुलिस कार्रवाई से इनकार करना, ये सभी पहलू मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण से गंभीर हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका:
मानपुर थाने की पुलिस ने इस मामले को प्राथमिकता से लेते हुए नामजद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद अब पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।
समाज में चर्चा का विषय:
यह घटना सिकराय क्षेत्र में चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। इस प्रकरण ने समाज में नाबालिगों की सुरक्षा और लैंगिक अपराधों के प्रति जागरूकता पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की जांच और आरोपी पर कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
निष्कर्ष:
यह घटना न केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि यह समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि नाबालिगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समाज की संवेदनशीलता ही ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकती है।

