पिछले चार दशक में पहली बार ऐसा हुआ है जब हमीरपुर जिले की सभी पांच सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा के लिए यह बड़ा झटका इसलिए भी है क्योंकि हमीरपुर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का गृहजनपद है। धूमल भले ही इस चुनाव में साइडलाइन रहे हों, लेकिन उनके बेटे अनुराग ठाकुर मोदी सरकार में ताकतवर मंत्री हैं। 1998 में भाजपा ने हमीरपुर की सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी और धूमल मुख्यमंत्री बने थे। 2003, 2007 और 2012 में भी भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा। 2017 में भाजपा पांच में से 3 सीटों पर हार गई थी। खुद धूमल भी सुजानपुर सीट पर कांग्रेस के राजिंदर राणा से हार गए थे।
2017 में धूमल परिवार को जो दर्द हमीरपुर ने दिया वह 5 साल बाद कई गुना बढ़ गया है। इस चुनाव में भाजपा को ना सिर्फ गढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा बल्कि हमीरपुर संसदीयक्षेत्र में 17 में से 12 सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी। पार्टी को ऊना जिले में 5 में से 4 विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जोकि हमीरपुर संसीदय क्षेत्र में आता है।
बड़ी बात यह है कि ना तो मुख्यमंत्री और ना ही उपमुख्यमंत्री दोनों में से हॉली लॉज में से एक भी नहीं है.
सुक्खू बने मुख्यमंत्री तो मुकेश अग्निहोत्री उपमुख्यमंत्री
दरअसल सभी कांग्रेस विधायकों की सहमति के बाद पार्टी हाईकमान ने सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री घोषित किया है, जो कि राजपूत चेहरा है. वहीं मुकेश अग्निहोत्री को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. सुखविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर जिला के नादौन से विधायक हैं और मुकेश अग्निहोत्री जिला ऊना के हरोली से विधायक हैं. मुकेश अग्निहोत्री इससे पहले जयराम सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस की तरफ से विधायक दल का नेतृत्व करते रहे हैं.
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का हॉली लॉज से गहरा कनेक्शन
भले ही मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री हॉली लॉज के रहने वाले नहीं हैं लेकिन देखा जाए तो उपमुख्यमंत्री बनाना हॉली लॉज वालों की ही पसंद है. दरअसल मुकेश अग्निहोत्री पूर्व सीएम के बेहद करीबी रहे हैं और वे वीरभद्र खेमे के माने जाते हैं. लिहाजा यह एक तरह से हॉली लॉज के समर्थकों की दूसरी पसंद थी कि अगर प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाता है तो मुकेश अग्निहोत्री को बनाया जाए.
सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ उनका समर्थन करने वाले विधायकों की 16 तादाद थी, जिसके बाद कहीं ना कहीं यह देखा जा सकता है कि विक्रमादित्य को देखते हुए पुत्र मोह और परिवारवाद की बयानबाजी से बचने के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाया गया.
सुखविंदर सिंह सुक्खू को राजपूत होने का भी मिला फायदा
अगर दूसरी तरफ देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश एक राजपूत समुदाय बाहुल्य प्रदेश है. लिहाजा सुखविंदर सिंह सुक्खू एक प्रभावशाली ठाकुर समुदाय से हैं और बड़ा चेहरा है. पार्टी ने ठाकुर समुदाय को साधने की कोशिशों के बीच प्रदेश की कमान सुखों के हाथ में दी है ताकि इसका फायदा 2024 के लोकसभा चुनाव में मिल सके.
ब्राह्मण समुदाय का दिग्गज चेहरा हैं मुकेश अग्निहोत्री
आपको बता दें कि मुकेश अग्निहोत्री ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. लिहाजा जहां पार्टी ने सुखों के जरिए ठाकुर समुदाय को साधने की कोशिश की है वहीं मुकेश अग्निहोत्री के जरिए ब्राह्मणों को भी साधने की कोशिश की है. मुकेश अग्निहोत्री हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का बड़ा चेहरा है.
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते हैं मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री
कांग्रेस हाईकमान ने कहीं ना कहीं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के घर को कब्जाने के लिए रणनीति बनाई है. सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री दोनों ही हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते हैं और यहां से अनुराग ठाकुर बीजेपी के सांसद हैं, जो कि केंद्र में मंत्री भी हैं. लिहाजा कांग्रेस ने 2024 के चुनावों को देखते हुए एक तो हमीरपुर को जीतने का कोशिश की है तो वहीं इन दोनों के जरिए प्रदेश के ब्राह्मण और राजपूत समुदाय को साधने के लिए ये रणनीति बनाई है.
वहीं अगर हॉली लॉज के नजरिए से देखा जाए तो मुकेश अग्निहोत्री हॉली लॉज के जरिए ही उपमुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में कमान संभालने उतरे हैं, भले ही प्रत्यक्ष तौर पर और इलाज से नहीं जुड़े हों लेकिन वीरभद्र के जरिए अप्रत्यक्ष तौर पर उनका हॉली लॉज से पुराना और गहरा नाता है.
इस तरह से बदले रिवाज के बीच यह भी कह कहा जा सकता है कि भले ही हॉली लॉज से प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं मिला लेकिन उपमुख्यमंत्री हॉली लॉज की तरफ से ही प्रदेश को दिया गया है तभी तो शायद 2022 विधानसभा चुनाव में प्रदेश को पहला उपमुख्यमंत्री मिला है.

